आयोजन: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार एवं बिहार संगीत नाटक अकादमी का संयुक्त आयोजन

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/“पांच दिवसीय महिला नाटक उत्सव 2026 के पांचवें दिन ‘आधे-अधूरे’ नाटक का मंचन”
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के संयुक्त तत्वावधान में प्रेमचंद रंगशाला, पटना में आयोजित महिला नाट्य उत्सव 2026 के पांचवें दिन नाट्य संस्था ‘जोगांजलि’ द्वारा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी श्रीमती सुबंती बनर्जी के निर्देशन में मोहन राकेश रचित नाटक ‘आधे-अधूरे’ का प्रभावशाली मंचन किया गया।
आधुनिक हिंदी रंगमंच के महत्वपूर्ण यथार्थवादी नाटकों में शुमार ‘आधे-अधूरे’ मध्यमवर्गीय परिवार की विघटित होती संरचना, रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट और व्यक्ति के आंतरिक अधूरेपन को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। नाटक की केंद्रीय पात्र सावित्री अपने परिवार की आर्थिक एवं भावनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जीवन में पूर्णता की तलाश करती है, किंतु परिस्थितियां उसे लगातार असंतोष और संघर्ष की ओर ले जाती हैं।
परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी-अपनी जटिलताओं और समस्याओं से जूझते हुए दिखाई देते हैं। नाटक के अंत में यह स्पष्ट होता है कि सावित्री जिस “पूर्ण पुरुष” की खोज में है, वह वास्तव में कहीं अस्तित्व में नहीं है। हर व्यक्ति अपने-अपने स्तर पर अधूरा है। अंततः सावित्री अपने उसी बिखरे हुए परिवार में लौट आती है, जहां सभी अपने अधूरेपन के साथ जीने को विवश हैं।
यह नाटक आधुनिक जीवन की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां व्यक्ति और उसके संबंध पूर्णता से कोसों दूर, “आधे-अधूरे” ही रह जाते हैं। नाटक की इस सशक्त प्रस्तुति को दर्शकों ने अत्यंत सराहा।
इसके अतिरिक्त, प्रेमचंद रंगशाला के बाहरी परिसर में नाट्य संस्था ‘क्रिएशन’ द्वारा नुक्कड़ नाटक ‘दहेज: एक त्रासदी’ का मंचन भी किया गया, जिसने सामाजिक कुरीति पर सार्थक संदेश दिया।
कार्यक्रम में बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के सचिव श्री महमूद आलम एवं सहायक सचिव सुश्री कीर्ति आलोक की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच संचालन सुश्री सोनी कुमारी द्वारा किया गया।

