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सीएम ने आईएएस अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा की ऐसा कदम उठाऊंगा जो बन जाएगा उदाहरण…
बिहार में आइएएस एसोसिएशन द्वारा आंदोलन के एलान के बाद राज्य सरकार की अन्य सेवाओं से जुड़े संगठनों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।बिहार पुलिस एसोसिएशन ने राज्य के थानों की बदतर स्थिति और अपराधियों की नकेल कसने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों पर सवाल खड़े किए हैं।एसोसिएशन ने निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की समस्याओं के निदान के लिए सरकार से एक कमेटी का गठन करने की मांग की है।बतादें कि बिहार में आइएएस एसोसिएशन के बाद बासा और डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी पहले ही सरकार के निर्णयों के खिलाफ आंदोलन की राह अख्तियार कर चुके हैं।बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि यदि सरकार राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था का दावा करती है तो इसमें एएसआइ से लेकर पुलिस निरीक्षक स्तर के निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों की सबसे बड़ी भूमिका है।लेकिन थानों का हाल बुरा है।राज्य के सैकड़ों थाने भवनहीन हैं।इनमें न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं ही हैं।सरकार से थानों को प्रति वाहन महीने में महज 110 लीटर डीजल या पेट्रोल उपलब्ध कराया जाता है।जबकि फरमान थानाक्षेत्र में सघन पुलिस गश्ती का जारी किया जाता है।सिंह ने कहा कि हमने इन समस्याओं पर सरकार का कई बार ध्यान आकृष्ट किया है लेकिन इसपर कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हो रही है।हमारी ड्यूटी ऐसी है कि त्योहार और शादी-ब्याह के मौकों पर भी हम अपने परिजनों के

साथ नहीं रह सकते।इसका पुलिसकर्मियों के मानसिक सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।सिंह ने कहा कि सरकार को थाना स्तर के पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक कमेटी का गठन करना चाहिए।ताकि उनकी समस्याओं के निदान के लिए सार्थक पहल हो सके।पेपर लीक कांड में आइएएस सुधीर कुमार की गिरफ्तारी पर मचे बचे बवाल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा में उन सभी लोगों के खिलाफ हमलावर दिखे, जो जांच और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे।नीतीश ने साफ कहा कि कानून अपना काम कर रहा। न कोई फंसेगा और न कोई बचेगा।आइएएस की गिरफ्तारी और पेपर लीक कांड के हर पहलू की जांच कराई जाएगी। हां, यह जरूर है कि इस मामले में सरकार ‘लैंडमार्क’ फैसला




