पौवाखाली की रफ्तार पर ग्रहण: अतिक्रमण, जाम और अंधेरे में डूबे चौक-चौराहे

किशनगंज, 12 अगस्त (के.स.)। फ़रीद अहमद, नगर पंचायत पौवाखाली आज एक तरफ जहां शहरीकरण के नए दावों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी समस्याओं का अंबार इसके नागरिकों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। सड़कों पर दिनों-दिन बढ़ता अतिक्रमण, सुबह से शाम तक मुख्य मार्ग को बंधक बनाता महाजाम, ढलती शाम के साथ चौक-चौराहों पर पसरा अंधेरा और सुरक्षा इंतजामों का यह अभाव अब केवल एक असुविधा मात्र नहीं रहा। यह स्थिति स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की उस उदासीनता का जीवंत दस्तावेज बन चुकी है, जिसने एक पूरे इलाके की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
नगर के मुख्य बाजारों और संपर्क मार्गों पर अतिक्रमण की समस्या अब नासूर की शक्ल ले चुकी है। फुटपाथों से लेकर आधी सड़कों तक दुकानदारों के फैले सामान, अव्यवस्थित ठेले और जहां-तहां खड़े वाहन सड़कों के वजूद को समेटते जा रहे हैं। पैदल चलने वालों के लिए सड़क किनारे का खाली जगह गायब हो चुकी हैं और जो राहगीर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, उन्हें हर कदम पर हादसों का डर सताता है। इस अनियंत्रित कब्जे का सीधा असर शहर की धमनी कहे जाने वाले यातायात पर पड़ रहा है। मुख्य चौक-चौराहों पर हर रोज पसीने में नहाती गाड़ियां, अब पौवाखाली की नित्य की कहानी बन चुके हैं।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह इलाका पूरी तरह राम भरोसे है। आज के आधुनिक दौर में जहां निगरानी और अपराध नियंत्रण का सबसे कारगर जरिया तकनीक है, वहीं पौवाखाली के किसी भी संवेदनशील चौक-चौराहे पर सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी का न होना नगर पंचायत के दावों की पोल खोलता है। चौक-चौराहों पर कैमरों का यह अभाव न केवल सामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ाता है, बल्कि किसी अनहोनी के वक्त सबूतों की खोज को भी नामुमकिन सा बना देता है।
सुरक्षा की इस ढीली डोर को और कमजोर बनाती है नगर की लचर प्रकाश व्यवस्था। सूरज डूबते ही जब शहर को रोशनी की जरूरत होती है, तब पौवाखाली के कई मुख्य मार्ग अंधेरे की काली चादर में लिपट जाते हैं। बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें और चौराहों पर लटके बेजान पोल न केवल हादसों का न्योता दे रहे हैं, बल्कि रात के वक्त आवाजाही करने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के मन में डर का खौफ भर देते हैं।
यदि पौवाखाली को इस कुप्रबंधन के भंवर से बाहर निकालना है, तो नगर पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अब कागजी बैठकों से बाहर निकलना होगा। सड़कों से अतिक्रमण हटाकर वेंडिंग जोन तय करना, ट्रैफिक कर्मियों की स्थायी तैनाती सुनिश्चित करना, सभी प्रमुख बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाना और पूरे शहर को दूधिया रोशनी से नहलाना अब कोई ऐच्छिक काम नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग है। अगर अब भी कोई ठोस और दूरगामी कदम नहीं उठाया गया, तो विकास की यह नई पटकथा महज़ एक छलावा बनकर रह जाएगी और पौवाखाली का नागरिक जीवन यूं ही अव्यवस्था के अंधेरे में दम तोड़ने को मजबूर रहेगा।



