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BJP प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने सम्राट अशोक के बारे में मर्यादाविहीन बातें बोलने वाले पर दी प्रतिक्रिया

सम्राट अशोक के बारे में लिखने से पहले सम्राट अशोक तथा उनके शासनकाल को जानना चाहिये, उनके खिलाफ लिखने वाले के अल्पज्ञान पर तरस आती है, मर्यादाविहीन बातें बोलकर सम्राट अशोक, मगध साम्राज्य, पाटलिपुत्र जो आधुनिक भारत, बिहार और पटना का अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है, इसके लिए क्षमा मांगना चाहिये।

चक्रवर्ती सम्राट अशोक (जन्म ईसा पूर्व 304- निधन ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे, सम्राट अशोक का पूरा नाम देवनामप्रिया (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) अशोक मौर्य था, उनका राजकाल ईसा पूर्व 268 से 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अखण्ड भारत पर राज्य किया, उनका मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक, तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान तक था। सम्राट अशोक का साम्राज्य आज का सम्पूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यान्मार के अधिकांश भूभाग पर था, यह विशाल साम्राज्य उस समय तक से आज तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य रहा है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्व के सभी महान एवं शक्तिशाली सम्राटों तथा राजाओं में शीर्ष स्थान पर रहे हैं, सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट रहे हैं, सम्राट अशोक को ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है – ‘सम्राटों का सम्राट’, यह स्थान भारत में केवल सम्राट अशोक को हीं मिला है। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भी जाना जाता है, सम्राट अशोक ने संपूर्ण एशिया में तथा अन्य आज के सभी महाद्विपों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया। सम्राट अशोक के सन्दर्भ के स्तम्भ एवं शिलालेख आज भी भारत के कई स्थानों पर मौजूद हैं, इसलिए सम्राट अशोक की ऐतिहासिक जानकारी अन्य किसी भी सम्राट या राजा से बहूत व्यापक तौर में मिलती है, सम्राट अशोक प्रेम, सहिष्णूता, सत्य, अहिंसा एवं शाकाहारी जीवनप्रणाली के सच्चे समर्थक थे, इसलिए उनका नाम इतिहास में महान परोपकारी सम्राट के रूप में दर्ज है।

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