अररिया : बच्चों में विकासात्मक विलंब और दिव्यांगता की पहचान के लिए सीएचओ एवं एएनएम का प्रशिक्षण संपन्न, योजनाओं को धरातल पर उतारने का आह्वान

अररिया, 14 सितंबर (के.स.)। अब्दुल कैय्युम, अररिया जिला के पलासी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलासी के प्रशिक्षण भवन में शनिवार को सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स और एएनएम के लिए ‘दिव्यांगता स्क्रीनिंग अनुसूची पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और यूनिसेफ के सहयोग से अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट पहल के तहत आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण का नेतृत्व प्रखंड सलाहकार उत्सव भारद्वाज ने किया। उन्होंने डीएसएस कैटलॉग और मार्गदर्शिका के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 0 से 6 वर्ष की उम्र बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, जिसमें उनके मस्तिष्क का लगभग 85% विकास हो जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को कैटलॉग में दी गई बीस बिंदुओं वाली विशेष ‘दिव्यांगता स्क्रीनिंग अनुसूची’ (चेकलिस्ट) को भरने का व्यावहारिक तरीका बताया गया।
प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं डीएसएस कैटलॉग पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण में आठ प्रकार की दिव्यांगता की पहचान: बच्चों में श्रवण, दृष्टि, वाणी एवं भाषा, शारीरिक, बौद्धिक, ऑटिज्म, बहु-दिव्यांगता और जन्मजात दोषों के शुरुआती लक्षणों को पहचानना।
चेतावनी संकेत गृह भ्रमण और टीकाकरण सत्रों के दौरान बच्चों के उठने-बैठने, बोलने और प्रतिक्रिया देने में हो रही देरी को कैसे मापें।
इस अवसर पर उपस्थित ब्लॉक हेल्थ मैनेजर खतीब अहमद ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सख्त निर्देश दिए कि इस कार्यक्रम को केवल कागजों तक सीमित न रखें। उन्होंने इस पूरी स्क्रीनिंग और रेफरल प्रक्रिया को पूरी गंभीरता के साथ “धरातल पर लाने” (जमीनी स्तर पर लागू करने) की बात कही ताकि सुदूर इलाकों के बच्चों को समय पर इलाज और मदद मिल सके।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर यूनिसेफ की टीम से अतुल राज, संजय सिंह और सुनील कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित थे और उन्होंने कार्यक्रम के सफल संचालन में अपना सहयोग दिया।



