राज्य

बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के अवसर पर कहा कि रेडियो डिजिटल युग में भी प्रासंगिक है और इसका प्रसारण न केवल समाचार और मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन के सूत्रधार भी है।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद। चाहे आपदा हो या उत्सव, प्रसारण हर पल जनता के साथ खड़ा रहता है। यह दिन भारतीय रेडियो के इतिहास में उसके गौरवशाली प्रसारण का प्रतीक है। ध्यातव्य है कि वर्ष 1927 में इसी दिन भारत में पहली बार रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई थी। इसकी शुरुआत बॉम्बे (अब मुंबई) से इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) द्वारा की गई थी, जो बाद में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में विलय हो गई। ऑल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी भी कहा गया। यह दिन मीडिया की स्वतंत्रता, जनजागरूकता और सांस्कृतिक विविधता के प्रसार को भी रेखांकित करता है।

 

Related Articles

Back to top button