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किशनगंज : महिलाओं को रखनी चाहिए कानूनी तौर पर गर्भसमापन के प्रावधानों की जानकारी

जिले के पोठिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समीक्षा बैठक में एएनएम एवं आशा के साथ सुरक्षित गर्भ समापन पर हुई चर्चा

किशनगंज, 09 मई (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, भारत में गर्भ समापन की जटिलता से बचने और इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कानून तैयार किये गये हैं। कानूनी प्रावधानों की मदद से सुरक्षित गर्भसमापन की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है। सुरक्षित गर्भसमापन संबंधित कानून की जानकारी को लेकर महिलाओं में जागरूकता आवश्यक है। विशेष परिस्थिति में महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रख इस कानून को महत्वपूर्ण बताया गया है। गर्भसमापन के कई कारण होते हैं जिसे कानूनी तरीके से समाप्त किया जा सकता है। यह जानकारी आईपास के राजीव गुप्ता ने किशनगंज जिले के पोठिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साप्ताहिक समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सांझा प्रयास नेटवर्क द्वारा एएनएम एवं आशा को सुरक्षित गर्भपात की जानकारी दी गयी। इस दौरान सभी कर्मियों को विशेष श्रेणी की महिलाओं के गर्भ समापन की अवधि 20 से 24 सप्ताह तक बढ़ाए जाने के कानून संसोधन के बारे में जानकारी प्रदान की गई। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रंजित कुमार ने बताया कि 1971 से पूर्व गर्भ समापन अवैध माना जाता था। गर्भ समापन में बड़ी कठिनाइयां होती थी।अनेक तरह के घरेलू उपायों से गर्भ समापन करने को प्रक्रिया में महिलाओं की मृत्यु तक हो जाती थी। उसे रोकने के लिए 1971 में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानि एमटीपी एक्ट बना। इसके बाद से सुरक्षित गर्भ समापन की प्रक्रिया को आसान किया गया। आईपास के राजीव गुप्ता ने बताया कि 1971 के प्रावधानों के अनुसार गर्भ समापन कई शर्तों के साथ वैध माना गया, लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। इसलिए समय के साथ एमटीपी एक्ट में संशोधन किये गये। इस संशोधन के मुताबिक विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर अब 24 सप्ताह कर दिया गया है। इस विशेष श्रेणी में वैसी महिलाएं शामिल हैं जिनका बलात्कार हुआ हो। डॉ शबनम यास्मिन ने बताया कि पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भ समापन को मान्य किया गया है। किसी भी महिला या उसके साथी के द्वारा प्रयोग किए गए गर्भनिरोधक तरीके की विफलता की स्थिति में अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन सेवाएं दी जा सकेंगी। 20 सप्ताह तक एमटीपी के लिए एक आरएमपी और 20 से 24 सप्ताह के लिए दो आरएमपी की राय चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखा जाना आवश्यक है।

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