किशनगंज : 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान को मिली रफ्तार, चिन्हित गांवों में सघन स्क्रीनिंग शुरू

किशनगंज,04अप्रैल(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान को नई गति मिली है। अभियान के तहत चिन्हित हाई रिस्क गांवों में सघन स्क्रीनिंग और जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पोर्टेबल एक्स-रे मशीन के माध्यम से गांव स्तर पर ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की पहचान संभव हो रही है।
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के आधार पर जिले के कई गांवों को चिन्हित कर अभियान का मुख्य केंद्र बनाया गया है। इन गांवों में स्वास्थ्य टीम घर-घर सर्वे, स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा सके।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन अभियान में अहम भूमिका निभा रही है। अब मरीजों को जांच के लिए अस्पताल आने की जरूरत कम हो गई है। स्वास्थ्य टीम सीधे गांवों में पहुंचकर मौके पर ही एक्स-रे जांच कर रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान में सघन स्क्रीनिंग और पोर्टेबल एक्स-रे जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लक्षण आधारित स्क्रीनिंग के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जांच की गति और सटीकता दोनों में वृद्धि हुई है।
अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई जा रही है तथा निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मरीजों का फॉलोअप कर दवा का पूरा कोर्स सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित संवाद कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार एवं सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचपी के जिला समन्वयक शामिल हुए। सभी ने लोगों से टीबी के लक्षणों के प्रति सतर्क रहने और समय पर जांच कराने की अपील की।
अधिकारियों ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता के माध्यम से ही जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।



