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कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर सहस्त्र गीता कंठनाद का शुभारंभ

सिद्धार्थ पाण्डेय/गीता मात्र एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, अपितु संपूर्ण मानवता के लिए जीवन प्रबंधन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग : अशोक अरोड़ा कुरुक्षेत्र, 27 मार्च। शुक्रवार को सहस्त्र गीता कंठनाद राष्ट्र जागरण महायज्ञ का शुभारंभ वैदिक मंत्रो के उच्चारण, शंखनाद एवं दीप प्रज्वलन के साथ अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न किया गया। इस अवसर पर संत परमहंस ज्ञानेश्वर महाराज, महंत बंसी पुरी महाराज, थानेसर विधायक एवं पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा तथा कुरुक्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज सेतिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गीता परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय मालपानी, अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. आशु गोयल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरिनारायण व्यास, उत्तरांचल प्रमुख मीनाक्षी गुप्ता, सुशील गुप्ता एवं पूर्वांचल प्रमुख आशा साबू उपस्थित रहे।

इस दौरान थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि गीता मात्र एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, अपितु संपूर्ण मानवता के लिए जीवन प्रबंधन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने गीता परिवार के इस अभियान को राष्ट्र निर्माण एवं युवाओं में नैतिक मूल्यों के संचार हेतु एक क्रांतिकारी प्रयास बताया। महंत बंसी पुरी ने गीता के मर्म को स्पष्ट करते हुए कहा कि गीता जहाँ निष्काम कर्म की शिक्षा देती है, वहीं यह भी बोध कराती है कि सकाम कर्म का उद्देश्य और विधि क्या होनी चाहिए। उन्होंने बल दिया कि फल निश्चित होने पर भी मनुष्य को अपने कर्तव्य कर्म से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। परमहंस ज्ञानेश्वर ने अपने मौन व्रत के मध्य ही गीता परिवार के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए अपना असीम एवं बलशाली आशीष प्रदान किया, जिससे संपूर्ण सभा ऊर्जावान हो उठी। इस अवसर पर देश-विदेश से पधारे प्रतिनिधियों एवं उनके प्रमुखों का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।

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