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बिहार शरीफ विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित माननीय सदस्य डॉ. सुनील कुमार एवं बाढ़ विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित माननीय सदस्य श्री सियाराम सिंह ने सदन में बिहार में प्रजापति (कुम्हार) जाति के उत्थान हेतु सदन के माध्यम से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद। उक्त प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि प्रजापति समाज की बड़ी आबादी मिट्टी के बने मूर्ति एवं बर्तन आदि उद्योग से जुड़े हैं। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में प्रजापति (कुम्हार) जाति के कल्याण के लिए माटीकला बोर्ड का गठन किया गया है, जो प्रजापति (कुम्हार) जाति के विकास के लिए कार्य करता है।सरकार बिहार में भी माटीकला बोर्ड के गठन कराने की कृपा करे।

इस प्रस्ताव पर माननीय उद्योग मंत्री, श्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में निवास करने वाले प्रजापति (कुम्हार) जाति के साथ-साथ कुंभकारी व्यवसाय एवं माटी कला से जुड़े कर्मकारों के कल्याण की दिशा में कल्याण एवं उनके सर्वांगीण विकास के लिए कृत संकल्पित है । उद्योग विभाग, बिहार सरकार के नियंत्रणाधीन उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, पटना द्वारा हस्तशिल्प में अन्य कलाओं के साथ माटी कला (टेराकोटा एवं सेरामिक कला) में भी निःशुल्क छमाही प्रशिक्षण एवं मासिक छात्रवृति के साथ राज्य के अन्य माटी कला के शिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराता है। माटी कला से संबंधित शिल्पियों को मेला एवं प्रदर्शनियों में निःशुल्क बिक्री केन्द्र (स्टॉल) भी उपलब्ध कराया जाता है और इसके लिए प्रति मेला इन्हें 5000/- रुपया प्रति शिल्पी यात्रा व्यय के रूप में भुगतान भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त मौलागंज, दरभंगा में टेराकोटा हेतु वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के IDPH (Integrated Development & Promotion of Handicrafts) योजनान्तर्गत सामान्य सुविधा केन्द्र की स्थापना की जा चुकी है, जिसे जीविका के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

इसके पश्चात माननीय अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने भी माननीय मंत्री से कहा कि राज्य में लगभग 28 लाख कुम्हार जाति के लोग हैं, जिनके हित को ध्यान में रखते हुए अन्य राज्यों की तरह ‘माटी कला बोर्ड’ की स्थापना के संबंध में सरकार समीक्षा कर भविष्य में इस बोर्ड का गठन कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करे।

 

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