सहरसा : पीजी सेंटर पश्चिमी परिसर में ‘श्रम प्रवासन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था’ पर मासिक संगोष्ठी आयोजित

सहरसा, 27 सितंबर (के.स.)। अजय कुमार, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पश्चिमी परिसर पीजी सेंटर सहरसा के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा मासिक विभागीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘श्रम प्रवासन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था: आजीविका चुनौतियाँ एवं समाधान’ रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता टी.पी. कॉलेज, मधेपुरा के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. दीपक कुमार राणा ने विषय प्रवेश कराते हुए अर्थशास्त्र के विभिन्न सैद्धांतिक प्रतिमानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आर्थर लुईस मॉडल, फाइ-रेनिस मॉडल एवं हैरिस-टोडारो मॉडल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर होने वाले श्रम प्रवासन के कारणों और आर्थिक प्रभावों को स्पष्ट किया।
परिसर प्रभारी डॉ. लाला प्रवीण कुमार सिन्हा ने प्रवासन के ‘पुश और पुल’ (Push and Pull) कारकों की चर्चा करते हुए कहा कि गांवों में अवसरों की कमी लोगों को बाहर जाने को विवश करती है। जबकि शहरों के आकर्षण उन्हें खींचते हैं।
हिंदी विभाग के वरीय प्राध्यापक डॉ. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखते हुए गिरमिटिया मजदूर प्रथा से लेकर आधुनिक श्रम प्रवासन की यात्रा और इसके कारण स्त्री अस्मिता व महिलाओं पर पड़ने वाले पारिवारिक-सामाजिक दंश को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया। मैथिली विभाग के प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कोसी क्षेत्र में प्रवासन की जमीनी हकीकत बयां करते हुए स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित व कुटीर उद्योग खोलने पर बल दिया।
हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. जैनेंद्र कुमार ने भिखारी ठाकुर की लोकप्रिय पंक्तियों के माध्यम से प्रवासन के दर्द को साझा करते हुए कहा कि सही नीतियों के माध्यम से प्रवासन को क्षेत्रीय विकास के अवसर में बदला जा सकता है। वहीं, मैथिली विभाग की डॉ. गीता कुमारी ने कोसी व मिथिलांचल के संदर्भ में प्रवासन से उत्पन्न पारिवारिक विघटन, बच्चों की परवरिश और सामाजिक चुनौतियों पर मार्मिक विचार रखे।
अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रम प्रवासन केवल आजीविका की खोज नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विषमता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है, जिसके लिए नीतिगत और सतत समाधान आवश्यक हैं।
संगोष्ठी में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम मोहन मिश्र, राजनीति विज्ञान की सहायक प्राध्यापिका डॉ. कविता कुमारी, इतिहास विभाग की सहायक प्राध्यापिका ममता रानी, डॉ. अंजू कुमारी सहित अन्य शिक्षकों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी डॉ. रुपेश कुमार, रंजीत कुमार, अजय कुमार, राहुल कुमार एवं स्नातकोत्तर सेमेस्टर-III के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर परिचर्चा में हिस्सा लिया। शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक व सफल बनाया।



