
रांची। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी देर रात बिना किसी प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचे। वे बिना बॉडीगार्ड के अस्पताल पहुंचे, जिसके कारण वहां मौजूद कई लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाए। बाद में जब लोगों को जानकारी हुई कि स्वयं स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पहुंचे हैं, तो अस्पताल प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य युवाओं से मुलाकात की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अनशन के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है। उनकी निगरानी और आवश्यक उपचार के लिए मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, दवा, जांच और इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। कई मरीजों ने मंत्री को अपनी समस्याओं और इलाज से जुड़े अनुभवों से भी अवगत कराया।
मरीजों से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बेहतर चिकित्सा सुविधा और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया तथा चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने अस्पताल कर्मियों को मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब रांची में छात्र आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती चर्चा में है। ऐसे माहौल के बीच डॉ. इरफान अंसारी का बिना सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचना, आंदोलनकारी युवाओं से मिलकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति जानना और फिर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों की समस्याएं सुनना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने मंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जब प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर सीधे मरीजों और आम लोगों के बीच पहुंचते हैं, तो इससे जनता के बीच भरोसा मजबूत होता है। लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से अधिक मरीजों की सेवा और मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी।
