*जीविका दीदियों की पहल से सुलभ हुआ इलाज: 45 स्वास्थ्य सहायता केंद्रों के जरिए गरीब परिवारों को मिल रहा बड़ा संबल*
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/-5 सितंबर 2022 को भागलपुर से हुई थी शुरुआत, अब तक राज्य के 35 बड़े सरकारी अस्पतालों और 10 मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य मित्र दे रहे चौबीसों घंटे अपनी सेवा
-मरीजों की जांच से लेकर दवा तक में मिल रही बड़ी मदद
पटना, 24 अगस्त।
सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जानकारी के अभाव में अक्सर इधर-उधर भटकना पड़ता है। उनकी इस समस्या का समाधान बनकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं जीविका दीदियां सामने आई हैं। राज्य सरकार और जीविका (बिहार ग्रामीण जीविका प्रोत्साहन समिति) के साझा प्रयासों से अस्पतालों में संचालित कुल 45 जीविका स्वास्थ्य सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) पर तैनात स्वास्थ्य मित्र के रूप में ये दीदियां लोगों को न सिर्फ बीमारी से संबंधित डॉक्टर बल्कि जांच और दवा केंद्र तक पहुंचने में बखूबी मदद कर रही हैं।
जीविका के पहले स्वास्थ्य सहायता केंद्र की स्थापना 5 सितंबर 2022 को भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में की गई थी। यहां अलग-अलग शिफ्टों में तैनात स्वास्थ्य मित्र के रूप में प्रशिक्षित यह दीदियां शिफ्ट के अनुसार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों से पहुंचने वाले लोगों को यह दीदियां बिना किसी भटकाव सीधे डॉक्टर का चेंबर और जांच, दवा केंद्र तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इस पहल की सफलता को देखते हुए इसका राज्य भर में तेजी से विस्तार किया गया। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में स्थापित 45 केंद्रों में से 35 सहायता केंद्र राज्य के बड़े सरकारी/जिला अस्पतालों में और 10 सहायता केंद्र प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालयों (मेडिकल कॉलेजों) एवं अस्पतालों में क्रियान्वित हैं।
*स्वास्थ्य मित्र संभाल रहे कमान, संकुल स्तरीय संघ द्वारा चयन*
सरकारी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेजों में संचालित सहायता केंद्रों के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) द्वारा स्वास्थ्य मित्रों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के बाद अस्पतालों में अलग-अलग शिफ्टों में तैनात ये स्वास्थ्य मित्र मरीजों की सहूलियत के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं। स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़े सदस्यों या उनके परिजनों के अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में स्वास्थ्य मित्र निर्धारित प्रपत्र (फॉर्म) में मरीजों का पूरा विवरण दर्ज करते हैं और उनकी आवश्यकतानुसार हर संभव मदद सुनिश्चित करते हैं।
*पंजीकरण से लेकर इलाज तक में समन्वय*
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परामर्श, बीमारियों की जांच, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, रक्त (ब्लड) एवं ऑक्सीजन का प्रबंध के साथ मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था कराने में जीविका दीदियां (स्वास्थ्य मित्र) सीधे तौर पर सहयोग करती हैं। इसके अलावा, बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ये स्वास्थ्य मित्र अस्पताल प्रशासन, डॉक्टरों, नर्सों, एएनएम, रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी कर्मियों एवं पंजीकरण कर्मचारियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर कार्य करते हैं।
*भर्ती मरीजों की ट्रैकिंग और अनुश्रवण*
अस्पतालों में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य में हो रहे सुधार का नियमित रूप से अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) किया जाता है। आगे के परामर्श और फॉलो-अप इलाज के लिए डॉक्टरों से समन्वय कराने का काम भी स्वास्थ्य मित्र करते हैं। इस व्यवस्था से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले ऐसे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले अस्पतालों की जटिल प्रक्रियाओं और भाग-दौड़ के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जीविका की यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान बना रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा का एक अनूठा मॉडल भी पेश कर रही।
बयानः
राज्य के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में हेल्प डेस्क जैसी व्यhuiवस्था का सीधा लाभ हमारे गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को मिल रहा है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि इलाज के लिए आने वाले हर व्यक्ति को त्वरित और सहज सहायता मिले, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई या बिचौलियों का सामना न करना पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं में यह सुधार जनता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
*श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग।*
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