MSME सशक्तीकरण और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व एवं माननीय उद्योग मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह के मार्गदर्शन में उद्योग विभाग, बिहार सरकार राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने के लिए आधारभूत संरचना के विस्तार, निवेशक-अनुकूल नीतियों, भूमि उपलब्धता, MSME सशक्तीकरण और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संवाद कक्ष में माननीय उद्योग मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री कुंदन कुमार की उपस्थिति में उद्योग विभाग द्वारा वर्ष 2025 से अबतक किए गये कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। इस दौरान हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक डॉ विद्या नंद सिंह, एमएसएमई निदेशालय के निदेशक श्री अमन समीर सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
वर्ष 2025 से अब तक राज्य को ₹1,21,863 करोड़ के 1,091 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के माध्यम से 68,807 से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन की संभावना है। औद्योगिक विकास की इस दिशा में उद्योग विभाग द्वारा निवेशकों को अनुकूल वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
1. औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और विस्तार: बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के लिए 14,600 एकड़ से अधिक नई औद्योगिक भूमि की उपलब्धता की दिशा में कार्य किया जा रहा है। भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य के 25 जिलों में 28 स्थलों पर नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे राज्य में बड़े एवं मध्यम स्तर की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
2. BIADA के माध्यम से भूमि आवंटन में प्रगति: बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 521 इकाइयों को 727.02 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से ₹18,380.25 करोड़ के निवेश और 49,167 रोजगार अवसरों का प्रस्ताव है। भूमि आवंटन की यह प्रगति राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
3. औद्योगिक क्षेत्रों और प्लग एंड प्ले सुविधाओं का विस्तार: बिहार में 94 औद्योगिक क्षेत्रों का नेटवर्क विकसित किया गया है। राज्य में 32 लाख वर्ग फुट से अधिक प्लग एंड प्ले औद्योगिक आधारभूत संरचना उपलब्ध है, जिससे उद्यमियों को तैयार सुविधाओं के साथ व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने में मदद मिलती है। औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, जल और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ प्रतिस्पर्धी लागत पर औद्योगिक स्थान उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
4. बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड: गया जी में लगभग 1,670 एकड़ क्षेत्र में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) का विकास तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह परियोजना बड़े पैमाने पर विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की क्षमता रखती है। इसके विकास से बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इसका शुभारंभ 24.10.2026 को माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा किया जा रहा है।
5. प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं का विकास: राज्य में क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें मुजफ्फरपुर में 143.96 एकड़ क्षेत्र में विकसित मेगा फूड पार्क, महिल-मोतीपुर में 62.17 एकड़ क्षेत्र में विकसित लेदर, फुटवियर एंड एक्सेसरीज क्लस्टर तथा फतुहा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, झंझारपुर में मॉडल ग्रीन इंडस्ट्रियल एरिया तथा कुमारबाग और नवानगर (बक्सर) में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से जुड़ी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इन परियोजनाओं से खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं मजबूत होंगी।
6. इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी की स्थापना की पहल: बिहार में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के विकास की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इस परियोजना के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है तथा प्रस्तावित अनुरोध-पत्र (RFP) को कैबिनेट के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने की योजना है। इससे राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, तकनीकी निवेश और संबंधित उद्योगों के विकास के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं।
7. बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025: राज्य में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 के तहत पात्र निवेशकों को मुफ्त भूमि दी जा रही है।
8. सेमीकंडक्टर और नई प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान: बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 के माध्यम से राज्य में उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के विकास की दिशा में पहल की गई है। इसके साथ ही पटना में ₹171 करोड़ के निवेश से 15 एकड़ क्षेत्र में एक नए प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना की जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य राज्य में तकनीकी क्षमता विकसित करना, नए निवेश को आकर्षित करना और भविष्य के उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
9. MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने की पहल: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए MSME निदेशालय तथा बिहार राज्य विपणन प्राधिकार की स्थापना की गई है। इसके साथ ही MSME केंद्रों के मॉडल को वैशाली में विकसित किया गया है और अब सभी जिलों में इसे विस्तारित किया जा रहा है। राज्य एवं जिला निर्यात कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और उद्यमियों की विपणन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
10. मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से उद्यमिता को प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत 47075 लाभार्थियों को छह उप-योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है। इसके तहत ₹3,414 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है। यह योजना नए उद्यमों की स्थापना, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
11. बिहार लघु उद्यमी योजना से आर्थिक सशक्तीकरण: बिहार लघु उद्यमी योजना के अंतर्गत 71,740 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है तथा ₹581 करोड़ की राशि वितरित की गई है।
12. स्टार्टअप बिहार के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा: स्टार्टअप बिहार के अंतर्गत 1,762 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं और ₹103 करोड़ की फंडिंग वितरित की गई है। राज्य में 22 इन्क्यूबेशन सेंटर, 47 स्टार्टअप सेल और तीन B-Hub को-वर्किंग स्पेस स्थापित किए गए हैं। यह व्यवस्था नए उद्यमियों को मार्गदर्शन, नेटवर्किंग, कार्यस्थल और वित्तीय सहायता से जोड़ने में मदद कर रही है।
13. PMEGP और PMFME में बिहार की उपलब्धियां: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत बिहार देश के अग्रणी प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है। राज्य में 41,155 इकाइयों को स्वीकृति दी गई है तथा ₹1,015 करोड़ की मार्जिन मनी जारी की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत बिहार को वर्ष 2026 में ‘Highest Sanction Achiever Category’ और ‘Best State’ का प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ये उपलब्धियां राज्य में उद्यमिता और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाती हैं।
14. PM विश्वकर्मा और कौशल विकास: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 1,62,053 कारीगरों का पंजीकरण किया गया, 1,20,885 कारीगरों का प्रशिक्षण पूरा हुआ, 24,615 ऋण वितरित किए गए और 77,628 लाभार्थियों को टूलकिट प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, RAMP कार्यक्रम के अंतर्गत 21,954 उद्यमिता विकास प्रशिक्षण पूरे किए गए हैं। राज्य के 20 जिलों में 28 प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन मिल सके।
15. निर्यात और बाजार विस्तार: बिहार में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए State Export Action Plan तथा District Export Action Plans तैयार किए गए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाना, जिला स्तर पर निर्यात की संभावनाओं की पहचान करना और उद्यमियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। बिहार राज्य विपणन प्राधिकरण की स्थापना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
16. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल सुधार: राज्य में निवेश संबंधी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 तथा जनविश्वास अधिनियम 2026 जैसी पहलें की गई हैं। नए सिंगल विंडो पोर्टल को अतिरिक्त सुविधाओं के साथ शुरू किया गया है। इसके माध्यम से निवेशकों और उद्यमियों को विभिन्न अनुमोदनों एवं सेवाओं तक डिजिटल माध्यम से पहुंच उपलब्ध कराने और प्रक्रियागत बाधाओं को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
17. महिला उद्यमियों और कार्यबल की भागीदारी: प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत 10 वर्किंग वीमेन हॉस्टल की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुंच को सुगम बनाना है। इसके साथ ही स्टार्टअप, MSME और उद्यमिता सहायता योजनाओं के माध्यम से समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
18. निवेश और रोजगार केंद्रित औद्योगिक विकास: बिहार सरकार की प्राथमिकता अधिक निवेश आकर्षित करने, अधिक रोजगार अवसर सृजित करने, MSME क्षेत्र को मजबूत बनाने, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने तथा समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करने की है। भूमि बैंक, औद्योगिक आधारभूत संरचना, क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों और उद्यमिता सहायता योजनाओं के माध्यम से राज्य में उद्योगों के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है।
19. MSME केंद्रों का उद्घाटन और नई नीतियां: उद्यमियों को योजनाओं और सरकारी सुविधाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री ने बिहार के सभी जिलों में एमएसएमई केंद्रों का उद्घाटन किया है। बिहार के MSME क्षेत्र को नई गति देने वाली कई महत्वपूर्ण पहलों का भी शुभारंभ किया गया है। बिहार MSME नीति, 2026, मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना (CM-CDP), 2026 तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली (MSEFC), 2026 भी लाई गई है।
20. महिल में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर का उद्घाटन: माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, श्री सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर, 2026 को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के औद्योगिक क्षेत्र महिल में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर क्लस्टर के अंतर्गत ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का भी लोकार्पण किया गया।
21. रिवैम्प्ड सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल: उद्योग विभाग ने Ease of Doing Business (EoDB) को और सुदृढ़ करते हुए उद्योग विभाग के रिवैम्प्ड सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल को लॉन्च किया। रिवैम्प्ड सिस्टम के लाइव होने के साथ अब 9 विभागों की 62 सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इसके माध्यम से निवेशक अपने प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक स्वीकृतियों की पहचान करने, लाइसेंस के लिए आवेदन करने, पहले से प्राप्त लाइसेंस अपलोड करने तथा अपने आवेदन की स्थिति को डिजिटल रूप से ट्रैक कर सकेंगे। इससे अलग-अलग विभागीय पोर्टल पर जाने की आवश्यकता कम होगी।
बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य की औद्योगिक क्षमता को विस्तार देते हुए निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना, स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। औद्योगिक आधारभूत संरचना, निवेशक सुविधा और नई प्रौद्योगिकी पर केंद्रित प्रयास बिहार को औद्योगिक विकास की नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।


