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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ (AES) की रोकथाम हेतु राज्य कार्यबल (State Task Force) की उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

* स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने राज्य में AES से निपटने के लिए की गई तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
* मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश: “चमकी बुखार” के खिलाफ तैयारी में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
* प्रभावित 12 जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़; डॉक्टरों की 24×7 उपस्थिति और एम्बुलेंस लिंकिंग सुनिश्चित करने का आदेश।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना: मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आज ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ (AES / चमकी बुखार) और जापानी इन्सेफलाइटिस (JE) की रोकथाम तथा तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य कार्यबल समिति (State Task Force Committee) की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई.

बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के सचिव श्री कुमार रवि द्वारा राज्य में AES प्रबंधन, अब तक की तैयारियों, बुनियादी ढांचे और अंतर-विभागीय समन्वय पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित जिलों में दवाओं, उपकरणों और मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार गैप असेसमेंट (Gap Assessment) और समीक्षा बैठकें की गई हैं.

राज्य के 12 अत्यधिक प्रभावित जिलों (मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर) में कुल 15 पीआईसीयू (PICU) क्रियाशील हैं. इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर के SKMCH में 100 बेड का विशेष PICU और 60 बेड का एन्सेफलाइटिस वार्ड तथा सदर अस्पताल में 10 बेड का वार्ड पूरी तरह तैयार है. अन्य जिलों और पीएचसी स्तर पर भी बेड आरक्षित किए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों को बिना किसी देरी के अस्पताल पहुँचाने के लिए 959 एम्बुलेंस (BLSA, ALSA और मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के वाहन) तैनात किए गए हैं. निजी वाहनों से मरीज को अस्पताल लाने पर ऑन-द-स्पॉट नकद भुगतान की व्यवस्था की गई है. सभी चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC/DH) पर आवश्यक 28 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं तथा मेडिकल कॉलेजों में 44 प्रकार की दवाएं और उपकरण 100% उपलब्ध हैं. माननीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा 1 जून 2026 को जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था, जो गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. इसके साथ ही मुजफ्फरपुर में लगातार ‘संध्या चौपाल’ का आयोजन कर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है.
प्रस्तुतीकरण की समीक्षा के बाद मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और “कोई भी बच्चा भूखे पेट नहीं सोना चाहिए” के संकल्प को धरातल पर उतारा जाए.

उन्होंने विभिन्न विभागों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए:

सुबह के समय डॉक्टरों की अनिवार्य उपस्थिति (4 AM to 6 AM Monitoring): मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि चूंकि AES के लगभग 80% मामले सुबह 4 से 6 बजे के बीच सामने आते हैं, इसलिए इस अवधि में सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए. इसकी निगरानी ‘दर्पण प्लस ऐप’ (Darpan Plus App) और 104 हेल्पलाइन के माध्यम से कड़ाई से की जाएगी. लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
अंतर-विभागीय समन्वय (Inter-Departmental Convergence):

समाज कल्याण विभाग: आंगनवाड़ी सेविकाएं और आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजें और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस (ORS) एवं पैरासिटामोल टैबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित करें. कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त टेक होम राशन (THR) दिया जाए.
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज: जीविका दीदियों और मुखियाओं के माध्यम से पंचायत स्तर पर बैठकों का आयोजन कर ग्रामीणों को चमकी बुखार के लक्षणों और बचाव के प्रति जागरूक किया जाए.

शिक्षा विभाग: स्कूलों में ‘सुरक्षित शनिवार’ कैलेंडर में AES प्रबंधन (चमकी को धमकी) को शामिल किया जाए और मिड-डे मील में प्रोटीन युक्त आहार की योजना बनाई जाए.
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED): प्रभावित टोलों और महादलित बस्तियों में पीने के पानी के स्रोतों की जांच की जाए, चापाकलों की मरम्मत और नियमित क्लोरिनेशन सुनिश्चित किया जाए.

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग: सुअरों और जल पक्षियों में वायरल गतिविधियों की जांच के लिए वेक्टर-आधारित निगरानी की जाए और रिहायशी इलाकों से सुअर पालन केंद्रों को दूर रखने के निर्देश जारी किए जाएं.

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) और सिविल सर्जनों (CSs) को निर्देश दिया कि वे स्वयं अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें और रेफरल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को पंचायत स्तर पर टैग करके रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति में बच्चे को तुरंत इलाज मिल सके.

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