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बच्चों को डराने-धमकाने से बाज आए सरकार, नहीं तो चुकानी होगी भारी कीमत: बाबूलाल मरांडी

रांची: छात्र नेत्री अमीषा प्रसाद को कोतवाली पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने की सूचना पर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कोतवाली थाना पहुंचे। मरांडी करीब दो घंटे तक थाने में मौजूद रहे, लेकिन उनकी अमीषा प्रसाद से मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अमीषा को थाने से कहीं अन्यत्र भेज दिया।थाने से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अमीषा प्रसाद कहां हैं, इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने की कोशिश बताया। मरांडी ने कहा कि अगर अमीषा पर कोई पुराना मामला था तो पुलिस को नियमानुसार नोटिस देना चाहिए था। इसके बाद कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि सरकार को बच्चों और छात्रों को डराने-धमकाने से बाज आना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और किसी की आवाज दबाने से वह खत्म नहीं होगी।

पुतला दहन को लेकर भी सरकार पर निशाना

बाबूलाल मरांडी ने पिछले दिन झारखंड के विभिन्न जिलों में हुए विरोध-प्रदर्शन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि रांची, गिरिडीह, हजारीबाग और रामगढ़ समेत कई स्थानों पर शांतिपूर्वक पुतला दहन कर रहे छात्रों पर लाठी-डंडे चलाए गए। उन्होंने रामगढ़ में एक झामुमो नेता द्वारा कथित तौर पर दी गई धमकी का उल्लेख करते हुए संबंधित नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। मरांडी ने कहा कि यदि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग कानून हाथ में लेंगे और उन्हें सरकार का संरक्षण मिलेगा, तो राज्य में कानून-व्यवस्था और अमन-चैन बनाए रखना मुश्किल होगा।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार संविधान के अनुसार चलती है और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को किसी भी स्थिति में दबाया नहीं जा सकता। मरांडी ने विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामलों में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान भाजपा नेता सीपी सिंह, रोशनी खलखो समेत अन्य नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 

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