
सासाराम, 11 सितंबर (के.स.)। डेस्क, रोहतास जिले के डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। करीब 12 साल पहले जिस महिला की हत्या का मामला दर्ज कर उसके पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों को जेल भेज दिया गया था, वह महिला अब झारखंड के गढ़वा जिले से जिंदा बरामद हुई है। महिला के जीवित मिलने के बाद उस समय नहर से बरामद शव की पहचान और पुलिसिया जांच पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला बालरति बिगहा (दहाउर) गांव का है। अगस्त 2014 में सरस्वती देवी उर्फ शकुंतला देवी एक रिश्तेदार के साथ अचानक लापता हो गई थी। 22 अगस्त 2014 को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव के पास नहर से एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। सरस्वती देवी के भाई ने शव की पहचान अपनी बहन के रूप में कर दी। इसके बाद पति अरुण मेहता समेत ससुराल पक्ष के आठ लोगों के खिलाफ दहेज हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अरुण मेहता, उसके पिता दिलीप मेहता और जेठ गोविंद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया था। गांव के चौकीदार ने भी शव की पहचान की पुष्टि की थी। इस मामले में आरोपित परिवार के लोगों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया और जेल की सजा झेलनी पड़ी।
गढ़वा में बदले नाम से रह रही थी महिला
हाल ही में परिजनों को जानकारी मिली कि सरस्वती देवी जीवित है और झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी गांव में कांति देवी के नाम से रह रही है। वह रट्टू सिंह नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी। जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने रोहतास के एसपी मिस्टर राज से शिकायत की।
एसपी के निर्देश पर डेहरी मुफस्सिल पुलिस की विशेष टीम झारखंड पहुंची और महिला को सकुशल बरामद कर सासाराम कोर्ट में पेश किया। महिला का 22 वर्षीय बेटा भी है, जिसे वह बचपन में छोड़कर चली गई थी।
महिला के जीवित मिलने के बाद अब पुलिस नए सिरे से जांच कर रही है कि 2014 में नहर से बरामद शव आखिर किसका था और उसकी पहचान सरस्वती देवी के रूप में कैसे हुई। एसपी मिस्टर राज ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले पीड़ित परिवार ने उनसे मिलकर मामले की जानकारी दी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई, जिसके बाद महिला को बरामद किया गया। पुलिस अब पूरे मामले की नए सिरे से जांच कर रही है।


