सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता : डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल

तालाब, पोखर, आहर और पईन की पहचान कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी तेज, विभाग अलग सेल बनाकर करेगा मॉनिटरिंग : जय सिंह
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा मंगलवार एक सितंबर को राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में “जल-जीवन-हरियाली दिवस” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं यथा-तालाबों, पोखरों, आहरों एवं पईनों को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कराना” विषय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं की पहचान कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तालाब, पोखर, आहर और पईन जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक जल संरचनाएं पर्यावरण संरक्षण, भू-जल स्तर को बनाए रखने तथा आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
माननीय मंत्री ने कहा कि जल स्रोतों और सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण गंभीर विषय है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करेगा और चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने इस कार्य में लगे सभी 15 विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों को और बेहतर तरीके से करने के लिए टीम के अन्य सदस्यों से उनके विचार जाना। माननीय मंत्री ने कहा कि इस दिशा में हम सभी को आगे की सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सोच से ये अभियान धरती पर उतरा। इसका परिणाम भी सामने है। आज हरित पट्टी और जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने में सकारात्मक परिणाम मिला है।
इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त कराने के कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए विभाग अलग सेल बनाकर मॉनिटरिंग करेगा। उन्होंने कहा कि तालाबों, पोखरों, आहरों और पईनों सहित अन्य सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं की पहचान और उनके संरक्षण के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
श्री जय सिंह ने कहा कि जल निकाय केवल प्राकृतिक संसाधन ही नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए इन संरचनाओं को संरक्षित रखना और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों से इस दिशा में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जल-जीवन-हरियाली अभियान के उद्देश्यों तथा सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई। परिचर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर सार्वजनिक जल निकायों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा अतिक्रमण के मामलों में प्रभावी और समयबद्ध कदम उठाए जाएं।
इस अवसर पर सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक श्री सुहर्ष भगत, मिशन निदेशक (जल-जीवन-हरियाली) श्री सुमित कुमार, उप मिशन निदेशक (जल-जीवन-हरियाली) श्री राम कुमार पोद्दार, विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. सुनील कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री नवाजिश अख्तर, सहायक निदेशक श्री सुबोध कुमार, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री सोनम कुमारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्रीमती पल्लवी, प्रशाखा पदाधिकारी श्री शशि शेखर समेत विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।


