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ठाकुरगंज : तीन करोड़ के भवन में दरार! रिपेयरिंग से पहले तकनीकी जांच की मांग

उद्घाटन के 14 दिन बाद पंचायत सरकार भवन में दरार, तीन करोड़ के निर्माण पर उठे सवाल, क्या सम्राट सरकार में नए भवनों की भी मरम्मती होती है

किशनगंज, 19 अगस्त (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, ठाकुरगंज प्रखंड की बंदरझुला पंचायत में करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित पंचायत सरकार भवन की दीवारों में दरारें आने का मामला सामने आया है। भवन का उद्घाटन पांच अगस्त को स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने किया था। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद भवन के अलग-अलग हिस्सों में दरारें और प्लास्टर झड़ने की शिकायत सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने नए सरकारी भवन में इतनी जल्दी दरारें आना गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने भवन की संरचनात्मक मजबूती और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

बताया जाता है कि भवन निर्माण के दौरान भी नींव और अन्य हिस्सों में खामियों को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें उठी थीं। इसके बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर भवन पंचायत को सौंप दिया गया। अब दरारें सामने आने के बाद निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत प्राक्कलन एवं डिजाइन के अनुरूप कार्य तथा विभागीय अभियंताओं के निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं।

रिपेयरिंग से पहले जांच की मांग

मामला सामने आने के बाद भवन की कथित तौर पर रिपेयरिंग कर खामियों को दूर करने की बात सामने आई है। इस पर ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भवन हाल ही में बनकर तैयार हुआ है तो इतनी जल्दी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का कहना है कि पहले दरारों के कारण और भवन की संरचनात्मक मजबूती की तकनीकी जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही मरम्मत कराई जानी चाहिए।

पूर्व मुखिया प्रतिनिधि बंदरझुला साबिर आलम ने भवन की नींव से लेकर पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भवन में आई दरार निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी है या किसी अन्य तकनीकी कारण से।

संवेदक के पूर्व कार्यों की भी जांच की मांग

स्थानीय लोगों द्वारा इसी संवेदक से जुड़े पूर्व के कुछ पंचायत सरकार भवनों के निर्माण में भी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें होने का दावा किया जा रहा है। इनमें भोठाथाना क्षेत्र एवं पिछला पंचायत के पंचायत सरकार भवन का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

लोगों ने मांग की है कि संबंधित संवेदक द्वारा पूर्व में कराए गए पंचायत सरकार भवनों के निर्माण कार्यों की भी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि निर्माण संबंधी शिकायतें किसी एक भवन तक सीमित हैं या नहीं।

सामग्री, प्राक्कलन और डिजाइन की हो जांच

ग्रामीणों ने जांच के दौरान भवन निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन एवं डिजाइन के अनुरूप निर्माण, नींव और संरचनात्मक हिस्सों की मजबूती सहित निर्माण कार्य के दौरान अभियंताओं द्वारा किए गए निरीक्षण की भी जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्य आवंटन और संवेदक की पात्रता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की मांग उठाई गई है।

जेई ने बताया एयर क्रैक

भवन में आई दरार को लेकर संबंधित जेई तनवीर आलम से पूछे जाने पर उन्होंने इसे “एयर क्रैक” बताया। हालांकि, मौके पर भौतिक जांच के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इससे स्थानीय लोगों की ओर से मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग और तेज हो गई है।

कार्यपालक अभियंता ने कही जांच की बात

स्थानीय क्षेत्र संगठन कार्य प्रमंडल, किशनगंज के कार्यपालक अभियंता मो. नसीम अख्तर ने बताया कि भवन में आई दरार की रिपेयरिंग कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं कार्यस्थल पर जाकर मामले की जांच करेंगे।

इधर, ग्रामीणों का सवाल है कि नवनिर्मित भवन में आई दरार की सीधे रिपेयरिंग कराने के बजाय पहले तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में खामी है तो केवल मरम्मत से जिम्मेदारी तय नहीं होगी। पहले दरार के वास्तविक कारण और निर्माण की गुणवत्ता की जांच आवश्यक है।गौर करे कि पंचायत के मुखिया इकरामुल हक ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से भवन में आई दरार को लेकर उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भवन जनता के पैसे से बनते हैं। ऐसे में निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद दरारें आने पर इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि, भवन में दरार किस तकनीकी कारण से आई है, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है।

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