*बिहार के श्रमिकों के लिए बड़ा तोहफा, वीबी जी राम जी में मिलेगी 300 रुपये प्रतिदिन*
– नई दिल्ली में आयोजित ग्रामोदय से राष्ट्रोदय कार्यक्रम में विभागीय मंत्री ने रखा था सुझाव
– केंद्र सरकार की ओर से प्रस्ताव स्वीकार करने से 45 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी में इजाफा
त्रिलोकी नाथ प्रसाद।बिहार के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। यहां अब वीबी जी राम जी अधिनियम (पहले मनरेगा योजना) के तहत मजदूरी करने वाले श्रमिकों को पहले से निर्धारित 255 रुपये प्रतिदिन के स्थान पर अब 300 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी दी जाएगी। केंद्र सरकार ने यह बदलाव ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माननीय मंत्री श्री श्रवण कुमार के हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में दिए गए सुझाव और अपील के बाद किया गया है।
मंत्री श्री कुमार ने बताया कि इससे पहले वीबी जी राम जी अधिनियम में बिहार जैसे राज्य के लिए 255 रुपये की मजदूरी निर्धारित थी। पिछले महीने 28 व 29 जून को नई दिल्ली में ग्रामोदय से राष्ट्रोदय थीम पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से सभी राज्यों की मजदूरी दर एक समान करने की अपील की गई थी। इसी अपील को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को स्वीकार किया और बिहार में योजना के तहत श्रम देने वाले मजदूरों की दैनिक मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से निर्धारित की गई है। हालांकि अभी भी कई राज्य ऐसे हैं जहां मजदूरी दर बिहार से भी अधिक है। इसमें मुख्य रूप से हरियाणा में 400, केरल में 346, गोवा में 356, कर्नाटक में 349, पंजाब में 322 और कर्नाटक में 349 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी निर्धारित है।
*ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान*
मंत्री श्री कुमार ने जारी अपने बयान में वीबी जी राम जी योजना के तहत मजदूरी बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार को हार्दिक बधाई और धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मजदूरी दर बढ़ाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। गांव की गरीबी में कमी आएगी और श्रमिकों के जीवन स्तर में भी सुधार होगा। मंत्री श्री कुमार ने बताया कि श्रमिकों की क्रय शक्ति बढ़ने से स्थानीय बाजारों में मांग पैदा होगी जिसका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के रूप में देखा जाएगा। उनके अनुसार इस नई योजना में मजदूरी दर के बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा बिहार जैसे राज्य से पलायन में कमी के रूप में देखा जाएगा। ग्रामीण श्रमिकों के शहरों की पलायन पर रोक लगने से वे कर्ज की जाल से मुक्त होंगे।


