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अत्यंत कमजोर जनजातीय समूह के विद्यार्थियों के लिए 6 जिलों में बनेंगे 15 छात्रावास कैबिनेट ने 41.25 करोड़ रुपए की मंजूरी दी चालू वित्तीय वर्ष में ही निर्माण कार्य पूरा करने का है लक्ष्य

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना। राज्य सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत राज्य के 6 जिलों में 15 छात्रावासों के निर्माण एवं संचालन के लिए कुल 41.25 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। छात्रावास निर्माण के लिए केंद्र सरकार 24.75 करोड़ तथा राज्य सरकार 16.50 करोड़ रुपए देगी।

शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक शिक्षा सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के सहयोग से इन छात्रावासों का संचालन नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा।

राज्य में अत्यंत कमजोर जनजातीय समूह के अंतर्गत मुख्य रूप से असुर, बिरहोर, बिरजिया, हिल खड़िया, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, महली तथा सवर जैसी जनजातियां शामिल हैं। ये समुदाय राज्य के विभिन्न जिलों में निवास करते हैं और शिक्षा सहित कई बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुंच सीमित है।

योजना के तहत कैमूर, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर और पूर्णिया जिलों में कुल 15 छात्रावासों का निर्माण एवं संचालन किया जाएगा। इन छात्रावासों में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकेंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान इन छात्रावासों के निर्माण एवं संचालन की प्रक्रिया को पूरा करना है। इस पहल से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी तथा उनके सामाजिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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