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भगवान बुद्ध के बताएं मार्गों पर ही चलकर समाज का भला हो सकता है:- श्रवण कुमार।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद /बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर केएसटी कॉलेज के अवस्थित बौद्ध टेम्पल में विधिवत रूप से पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि शांति की कामना जदयू विधायक दल के नेता पूर्व मंत्री श्रवण कुमार ने की।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के बतायें मार्गों पर चलकर ही विश्व का कल्याण हो सकता है एवं शांति रह सकती है।आज हम सब यहाँ एक ऐसे महान संत, समाज सुधारक और मानवता के पुजारी महतो बाबा की जयंती के पावन अवसर पर एकत्रित हुए हैं, जिनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वैशाख पूर्णिमा का यह शुभ दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाला दिवस है। इस पावन अवसर पर हम महतो बाबा को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को स्मरण करते हैं।

महतो बाबा का जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी भौतिक सुख-सुविधाओं को महत्व नहीं दिया, बल्कि समाज के कमजोर, पीड़ित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वे मानते थे कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें मानव सेवा का भाव हो। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि जाति, धर्म, ऊँच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर सभी मनुष्यों को एक समान समझना चाहिए।

महतो बाबा का संदेश अत्यंत सरल लेकिन गहन था—“मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।” आज जब समाज में विभाजन, स्वार्थ और असहिष्णुता बढ़ती जा रही है, तब उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सच्चा संत वही होता है, जो समाज के दुखों को समझे और उन्हें दूर करने का प्रयास करे।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह साधन है, जो समाज को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जा सकता है। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों को शिक्षित करें और समाज में जागरूकता फैलाएँ। महतो बाबा ने यह भी सिखाया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिकता, संस्कार और जीवन मूल्यों का समावेश होना चाहिए।

महतो बाबा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने लोगों को समझाया कि अंधविश्वास से केवल भ्रम और नुकसान होता है, जबकि सत्य और विज्ञान हमें सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने समाज को जागरूक बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए और लोगों को तार्किक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उनका जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक था। उन्होंने कभी अपने लिए कुछ नहीं माँगा, बल्कि हमेशा दूसरों के कल्याण के बारे में सोचा। वे सादा जीवन और उच्च विचार के सच्चे अनुयायी थे। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि जो भी उनके संपर्क में आता, वह उनके विचारों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता था।महतो बाबा ने हमेशा समाज में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में एकता नहीं होगी, तब तक विकास संभव नहीं है। उन्होंने लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया। उनका यह संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उस समय था।
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि वैशाख पूर्णिमा का यह दिन हमें महतो बाबा के साथ-साथ अन्य महान संतों और महापुरुषों की भी याद दिलाता है, जिन्होंने मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। यह दिन हमें आत्मचिंतन करने का अवसर देता है कि हम अपने जीवन में उनके आदर्शों को कितना अपनाते हैं।

आज के इस आधुनिक युग में, जब भौतिकवाद और प्रतिस्पर्धा ने मानव जीवन को जटिल बना दिया है, तब महतो बाबा के विचार हमें सादगी, संतोष और सेवा का मार्ग दिखाते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने और समाज के लिए कुछ करने में है।इस अवसर पर महाबोधि महाविद्यालय के सचिव राजेंद्र प्रसाद प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार केएस टी प्राचार्य डा संजीत कुमार डा सुधीर कुमार जदयू प्रवक्ता डॉ धनंजय कुमार देव देवेन्द्र कुशवाहा आनंदमूर्ति विकास मेहता आकाश कु मोनू मुकेश सिंह भंते डा धम्मारत्ना भंते नरावडीह भंते खेमा सामी भंते सूर्या भंते सोविता भंते जागरिया सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहें।

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