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तस्वीर बदल दी, तकदीर बदलने की यात्रा का नाम है समृद्धि यात्रा – जद (यू)

मुकेश कुमार/जद (यू) विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री नीरज कुमार, प्रदेश प्रवक्ता डा0 निहोरा प्रसाद यादव, प्रदेश प्रवक्ता श्री परिमल कुमार, पार्टी मीडिया पैनलिस्ट श्री किशोर कुणाल एवं छात्र जद (यू) के प्रवक्ता श्री आनंद माधव ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड के बीच मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई समृद्धि यात्रा किसी भी प्रकार से राजनीतिक यात्रा नहीं है, जैसा कि विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। यह यात्रा वास्तव में ग्राउंड लेवल पर बिहार सरकार की योजनाओं का आॅडिट है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चरणों में शीश झुकाकर बिहार की तस्वीर बदलने के बाद अब मुख्यमंत्री की यह यात्रा बिहार की तकदीर बदलने की लड़ाई है। देश में यह पहली सरकार है जिसने प्रगति यात्रा के दौरान लिए गए विकास निर्णयों को सीधे कैबिनेट से स्वीकृति दिलाकर केवल घोषणा नहीं, बल्कि क्रियान्वयन तक का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया।
पश्चिम चंपारण, जो कभी अपहरण उद्योग और भय के लिए जाना जाता था, आज वहीं मर्चा धान को जीआई टैग मिला है और क्षेत्र तेजी से पर्यटन के केंद्र के रूप में उभरा है। वर्ष 2024-25 में लगभग 4 लाख 80 हजार से अधिक पर्यटक वहां पहुंचे, जहां कभी लोग दिन में भी निकलने से डरते थे। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर मुख्यमंत्री ने चंपारण की पहचान बदल दी है। आज यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि चंपारण बिहार का स्विट्जरलैंड बन चुका है।
कोविड-19 के दौरान लौटे प्रवासी मजदूरों ने यहीं काम करने का निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप चनपटिया माॅडल विकसित हुआ। आज कश्मीरी शाॅल और अन्य उत्पाद चनपटिया में ही उपलब्ध हैं और वहां बने बर्तन व कपड़े भूटान, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान तक निर्यात हो रहे हैं। यह सब बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत नीतीश सरकार द्वारा दिए गए संबल का परिणाम है। कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने चंपारण सहित पूरे बिहार से भय का वातावरण समाप्त किया है, थारू जनजाति की बेटियों के लिए बिहार स्वाभिमान बटालियन जैसी पहल की है और किसानों को जीआई टैग का लाभ दिलाकर उनकी आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है। यह सरकार केवल तस्वीर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की तकदीर बदलने के लिए प्रतिबद्ध है, और उसी का प्रतिबिंब सात निश्चय पार्ट थ्री में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

 

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