राजनीति
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देश की जनता उन्हें तहे दिल से प्यार करती है।उन्हें लगता था कि अगर नेता जी कहीं फिर से लौट आये तो पलक झपकते उनकी सत्ता चली जाएगी।जाहिर है,नेहरु जी की सोच के साथ नेहरु के कांग्रेसी चाटुकार खड़े थे।1964 में नेहरु जी की मृत्यु के बाद भी 1968 तक नेताजी के परिजनों पर खुफिया एजेसियों की नजर रही।नेताजी के सबसे करीबी भतीजे अमिया नाथ बोस 1957 में जापान गए थे।इस बात की जानकारी नेहरु जी को मिली।उन्होंने 26 नवंबर,1957 को देश के विदेश सचिव सुबीमल दत्ता से कहा कि वे भारत के टोक्यों में राजदूत की ड्यूटी लगायें और यह पता करें कि अमिया नाथ बोस जापान में क्या कर रहे हैं ?यही नहीं उन्होंने इस बात की भी जानकारी देने को कहा था कि अमिया बोस भारतीय दूतावास या जहाँ तथा कथित रूप से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की अस्थियां रखी गयी हैं,वहां गये थे या नहीं।
सवाल यह उठता है कि आखिर नेहरु जी जापान में अमिया नाथ बोस की गतिविधियों को जानने को लेकर इतने उत्सुक क्यों थे ? क्या उन्हें लगता था कि यदि अमिया नाथ की गतिविधियों पर नजर ऱखने से नेताजी के बारे में उन्हें पुख्ता जानकारी मिल सकेगी ? इसके बाद से तो अमिया नाथ बोस पर देश में और उनके देश से बाहर जाने पर खुफिया नजर रखी जाने लगी और इस बात के प्रमाण भी मौजूद हैं कि अमिया नाथ बोस पर नजर रखने के निर्देश खुद नेहरु जी ने दिए थे।

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