फरक्का जल संधि के कारण बिहार में जलसंकट, नवीनीकरण मंजूर नहीं – संजय झा
फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को दोतरफा नुकसान - उमेश कुशवाहा

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/लखीसराय से शुरू हुआ जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का तीसरा चरण, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने किया संवाद
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को लखीसराय से जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम तीसरा चरण शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के उन 12 जिलों में संवाद निर्धारित है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं।
ध्यातव्य है कि संवाद कार्यक्रम के पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया जिले, तो दूसरे चरण में सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना जिले शामिल थे। तीसरे चरण का आगाज लखीसराय से हुआ। इसके बाद मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में संवाद कार्यक्रम निर्धारित है। बता दें कि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। यही कारण है कि इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन 4 नवंबर को कटिहार में होगा।
इस मौके पर लखीसराय के टाउन हाॅल में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विधायक श्री रामानंद मंडल एवं जिलाध्यक्ष श्री रामानुज शर्मा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डाॅक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं। श्री संजय कुमार झा ने आगे कहा कि इस संधि के कारण शुष्क मौसम में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को दोतरफा नुकसान हो रहा है। जहाँ फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से उसका तल ऊँचा हो गया है और उसके कारण हमें हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, वहीं फरक्का जल संधि के कारण हमें अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को देना पड़ता है और इस कारण हमारे कई जिलों में सूखे की स्थिति आ जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73ः बोझ अकेला बिहार उठा रहा है, ये बिहार के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है? श्री कुशवाहा ने श्री संजय कुमार झा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाया और उनके प्रयासों से यह राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना।
वहीं, विधायक श्री रामानंद मंडल एवं जिलाध्यक्ष श्री रामानुज शर्मा ने इस मौके पर कहा कि जदयू की ये पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि ये हमारी पार्टी का जनसरोकार है। ये बिहार के हक और बिहारवासियों के हित की बात है। हमें पता होना चाहिए कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को कैसे और कितना नुकसान हो रहा है। हमलोग बिहार की आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं ताकि गंगा से जुडे़ सवाल देश के सामने आएं और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो।

