अररिया: उर्दू निदेशालय के तत्वावधान में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा एवं कार्यशाला का आयोजन संपन्न
डीएम ने कहा- उर्दू भाईचारे की भाषा, ऐसे आयोजनों से मिलता है संबल

अररिया,30अगस्त(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह/अब्दुल कैय्युम, उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना के दिशा-निर्देश में जिला प्रशासन अररिया एवं जिला उर्दू भाषा कोषांग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को टाउन हॉल, अररिया में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा और कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी अनिल कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों व गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और शाल भेंट कर सम्मानपूर्वक किया गया।
इस अवसर पर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी वसीम अहमद, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग दिलीप कुमार, प्रभारी पदाधिकारी, उर्दू भाषा कोषांग जुल्फकार अली समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र के बाद वार्षिक पत्रिका ‘जिला उर्दू नामा अररिया’ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि उर्दू मिठास, तहजीब और भाईचारे की भाषा है। यह भाषा अनेकता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम अनुमंडल, प्रखंड और विद्यालय स्तर पर भी आयोजित होने चाहिए।
पहला सत्र: फरोग-ए-उर्दू सेमिनार
इस सत्र में विशेषज्ञ वक्ताओं ने उर्दू भाषा की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे:
- आफताब आलम (प्राचार्य, डीईटीई फारबिसगंज) – सार्वजनिक स्तर पर उर्दू भाषा की समस्याएं और समाधान।
- इनायतुल्लाह नदवी (प्राचार्य, पिपुल्स कॉलेज) – सरकारी स्तर पर उर्दू के विकास की भूमिका।
- हुमायूं इकबाल नदवी (शिक्षक, मदरसा इस्लामिया यतीमखाना) – प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में उर्दू की स्थिति।
प्रतिनिधियों ने भी विचार साझा किए:
- पत्रकार परवेज आलम – अररिया में उर्दू का विकास।
- प्रधान शिक्षक मुशीर आलम – रोजगार के अवसर।
- जफर रहमानी – उर्दू शिक्षकों की जिम्मेदारियां।
छात्राओं उजमा परवीन, ऐमन आयशा, सदा आजाद व सदफ आजाद ने अपनी खूबसूरत ग़ज़लों और कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दूसरा सत्र: मुशायरा
दूसरे सत्र में आयोजित मुशायरे में क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय कवियों ने शिरकत की।
मुख्य भागीदारी:
तारीक बिन साकिब, अरशद अनवर अलिफ, अब्दुल बारी जख्मी, खुर्शीद कमर, खातिब हैदर, मो० जुनेद आलम, मो० अत्ताउल्लाह, मुश्ताक अंजुम, फैयाज रही एवं शंकर कैमुरी।
शंकर कैमुरी की ग़ज़लों को विशेष सराहना और तालियां मिलीं।
तीसरा सत्र: उर्दू कार्यशाला
अंतिम सत्र में आयोजित उर्दू कार्यशाला में जिले के सभी प्रखंडों से आए शिक्षकगण शामिल हुए। कार्यशाला में उर्दू शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और शिक्षक-छात्र सहभागिता पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे प्रभारी पदाधिकारी जुल्फकार अली ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की सफलता में योगदान देनेवाले प्रमुख सदस्य
- उर्दू अनुवादक: ताजीम अहमद, मो० मिनहाज आलम, मो० मशकूर आलम, अनवर हुसैन, मो० असरारूल हक, सलमा रहमानी, खुशबू दिलकश।
- सहायक अनुवादक: ओसामा साबिर, इंतखाब पाशा, रेहान अहमद, मो० गौहर, गौसिया नाज, फरहत निगाह।
- प्रशासनिक सहयोग: राहिब अख्तर (नि.व. लिपिक), इम्तियाज अली अंसारी (उ.व. लिपिक)।
यह आयोजन उर्दू भाषा के संवर्धन, साहित्यिक प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और सांस्कृतिक समरसता की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में यादगार रहा।