महिला दिवस का सच: सम्मान की बातें, लेकिन भेदभाव अब भी बरकरार: अम्बा प्रसाद

महिला दिवस पर बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि महिला शशक्तीकरण पर बहुत लोग बोलेंगे लेकिन शशक्तीकरण तबतक संभव नहीं है जब तक लिंग भेद समाज मे रहेगा । बहुत सारे देशों के संविधान के पन्ने पर लिंग के आधार पर भेदभेद वर्जित किया गया है परंतु सामाजिक स्तर पर ये मानसिकता भरपूर बरक़रार है । सामान्य एक उद्धरण देते है की 1947 की आज़ादी के बाद से क़रीब 77 साल के ऊपर बीत गए और संविधान का भी लगभग उतना ही उमर हो गया है । परंतु भारत के प्रधानमंत्री के तख्त पर केवल एक ही महिला प्रधानमंत्री दिखाई दे रही है,वो केवल इंद्र गांधी जी है बाकी सब पुरुष है । देश की आर्मी नेवी एयर फोर्स चीफ कमांड पर कोई महिला को आज तक हमने नहीं देखा ।रिज़र्व बैंक की गवर्नर एक बार एक महिला हुई थी बाक़ी हमने नहीं देखा । राज्यो के गवर्नर मे भी,आज तक एकाद महिला को कभी कबार दिखा गया । अवसतन 90% मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री हमारे देश के पुरुष ही है । तो महिला दिवस मनाने की खुशी हमको तब होगी और अवचित्य तब होगी जब हमारे घर के 70% से ज़्यादा घरेलू औरतों को यानी जो homemaker है और हाउसवाइफ है उन्हें उनके पति द्वारा बराबर की अहमियत दी जाएगी । ये अंतरस्तिया महिला दिवस है और विश्व के सबसे बड़ा पूंजीवादी देश अमेरिका की औरते भी अपना वजूद तलाश रही है,सबसे ज़्यादा डाइवोर्स केस वही है ,सबसे ज़्यादा divorce का मामला उसी देश का है,सबसे ज़्यादा शाररिक उत्पीड़न का मामला उसी देश का है जिसका विकास दर हमसे 500 गुना आगे है । अगल बगल नज़र घुमाइएगा तो हमारे पड़ोसी देशों का भी लगभग यही हाल है कहीं कहीं इससे भी बुरा है ।



