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नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर में विकास का सच, भ्रष्टाचार के जलजले से जनता त्रस्त

सहरसा,31जनवरी(के.स.)। धर्मेंद्र सिंह, नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अधिकांश योजनाओं की स्थिति हैरतअंगेज बताई जा रही है। वर्तमान में नगर परिषद में करीब 50 योजनाएं निविदा के माध्यम से तथा 85 योजनाएं विभागीय स्तर पर संचालित हैं, लेकिन अपवाद को छोड़ दें तो अधिकतर योजनाओं में पारदर्शिता का घोर अभाव देखा जा रहा है।

नियम-कानून को दरकिनार कर कई योजनाओं में योजना बोर्ड तक नहीं लगाए जाते, जिससे योजनाओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाती।

जानकारों का कहना है कि इसी का लाभ उठाकर सरकारी राशि की खुलेआम बंदरबांट की जा रही है। आरोप है कि नगर परिषद कार्यालय नियमों के अनुसार नहीं, बल्कि बाबुओं की मनमानी से संचालित हो रहा है।

वार्ड संख्या-07 के अशरफ चक मोहल्ले में विभागीय योजना संख्या 32/2024-25 के तहत सैयद माहिर अशरफ के घर से मो. राजिक के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के महज एक माह के भीतर ही सड़क टूटकर बिखर गई, जिससे स्थिति किसी जलजले जैसी प्रतीत होने लगी। मामले ने तूल पकड़ा तो विभाग द्वारा खानापूर्ति के तौर पर सतही मरम्मत करा दी गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त सड़क अब तक कम से कम तीन बार टूट चुकी है और हर बार केवल औपचारिक मरम्मत कर मामला दबा दिया गया। वर्तमान स्थिति यह है कि सड़क फिर से जर्जर हो चुकी है, लेकिन अब मरम्मत तो दूर, कोई कर्मी देखने तक नहीं पहुंचता।स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा योजनाओं को घर बैठे स्वीकृत कर दिया जाता है और कई बार योजना स्थल का सही पता तक स्पष्ट नहीं रहता। नगर परिषद के गठन के कुछ ही माह बाद से विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहने लगी थी, जिसकी कभी गहन जांच नहीं हुई।

परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार की यह धारा समय के साथ और चौड़ी होती चली गई, जो आज भी अनवरत जारी है। जनता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी पदाधिकारियों व कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है।

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