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अहिंसा और शांति का मार्ग ही वैश्विक मार्ग है – ओम बिड़ला

मुंबई में आयोजित जैन आचार्य, पद्म भूषण रत्नसुंदर सूरीश्वर महाराज के साहित्यिक योगदान पर आधारित ऊर्जा 500 महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
आज जब विश्व में शांति की आवश्यकता है, जैन दर्शन के अहिंसा, शांति और मानवीय मूल्यों पर आधारित विचार बहुत प्रासंगिक हो जाते हैं। अहिंसा और शांति का मार्ग ही वैश्विक मार्ग है।
आज के समय में जब लोग अपने दैनिक दायित्वों और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में 500 पुस्तकों का लेखन पूर्ण करना आचार्य श्री की अद्भुत साधना, अनुशासन और साहित्य के प्रति समर्पण का सशक्त प्रमाण है। यह साहित्य समाज को आत्मचिंतन, संयम और सद्भाव की दिशा देता है।

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