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कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार द्वारा 20 फरवरी 2026 को भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना में सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘शुक्रगुलजार’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कला प्रेमियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशा एवं बिहार कला पुरस्कार 2023-24 से सम्मानित भोजपुरी लोकगायक श्री अमरेश कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशा ने श्री अमरेश कुमार और सोमा मंडल को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इसी के साथ सभागार में सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हुआ।

भोजपुरी लोकगायक श्री अमरेश कुमार ने गणेश वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और अपनी मधुर वाणी से श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके पश्चात प्रस्तुत झूमर गीत ‘गोर गोर बहियां’ ने दर्शकों को तालियां बजाने पर विवश कर दिया।

पूर्वी एवं नेटुआ आदि जैसे पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति ने सभागार में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया, जिससे श्रोता झूम उठे।

श्री अमरेश कुमार ने अपने गुरु श्री मनोरंजन ओझा के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया तथा अपनी संपूर्ण प्रस्तुति को अपने गुरु को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। इस भावपूर्ण क्षण ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।

कार्यक्रम के अगले चरण में श्रीमती सोमा मंडल ने भरतनाट्यम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। जगमोहन कृष्णा राग पर आधारित उनके नृत्य ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच विशेष सराहना प्राप्त की। उनकी सधी हुई मुद्राएं, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लय पर अद्भुत पकड़ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के समापन पर सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा, जो उनकी उत्कृष्ट साधना और समर्पण का प्रमाण था। उनकी प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और सौंदर्य का उत्कृष्ट उदाहरण रही।

कार्यक्रम में संगतकारों का भी सराहनीय योगदान रहा। ढोलक पर मिथलेश कुमार, बैंजो पर मनोज कुमार तथा इफेक्ट्स पर अशोक कुमार ने संगीत की मधुरता को और प्रभावी बनाया।

मंच संचालन का दायित्व सोमा चक्रवर्ती ने कुशलतापूर्वक निभाया। उनके सधे हुए संचालन ने कार्यक्रम को निरंतरता और गरिमा प्रदान की।

‘शुक्रगुलजार’ कार्यक्रम ने लोक एवं शास्त्रीय कला के समन्वय के माध्यम से सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त संदेश दिया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम दर्शकों के लिए अविस्मरणीय रहा।

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