किशनगंज : एसएनसीयू में छह दिन के इलाज ने बचाई नन्ही जिंदगी, स्वस्थ होकर घर लौटा नवजात
निजी अस्पताल में इलाज कराना परिवार के लिए था मुश्किल, सदर अस्पताल की सुविधा बनी उम्मीद का सहारा

किशनगंज, 30 अक्टूबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, आर्थिक परेशानी के बीच जब नवजात की तबीयत बिगड़ी तो परिवार की चिंता बढ़ गई। निजी अस्पताल में इलाज कराना मुश्किल था, लेकिन सदर अस्पताल किशनगंज की विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) ने परिवार को नई उम्मीद दी। यहां चिकित्सकों की देखरेख में उपचार मिलने के बाद नवजात स्वस्थ हुआ और परिवार उसे लेकर घर लौट गया।
बहादुरगंज प्रखंड के अल्ताबाड़ी निवासी जूली बेगम और उनके पति मोहम्मद बदरुल के नवजात को 25 सितंबर 2026 को सदर अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। बच्चे को विशेष चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत थी। छह दिनों तक उपचार और निगरानी के बाद एक अक्टूबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चे के स्वस्थ होकर घर लौटने से परिवार ने राहत की सांस ली।
मोहम्मद बदरुल ने बताया कि बच्चे की तबीयत को लेकर पूरा परिवार परेशान था। सदर अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलने से बड़ी राहत मिली। यदि यहां उपचार उपलब्ध नहीं होता तो निजी अस्पताल में इलाज कराना उनके लिए काफी मुश्किल होता। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताया।
269 नवजातों को मिला एसएनसीयू का लाभ
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक जुलाई से आठ अक्टूबर 2026 के बीच एसएनसीयू में कुल 269 नवजात भर्ती हुए। इनमें 45 नवजात निजी अस्पतालों से रेफर होकर आए थे। इस अवधि में 235 नवजातों को छुट्टी दी गई, जबकि 15 को बेहतर उपचार के लिए उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान रेफर किया गया।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि आर्थिक कठिनाई के कारण कोई भी परिवार इलाज से वंचित नहीं रहे, यह सुनिश्चित करना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने अभिभावकों से नवजात की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
वहीं डॉ. मंजर आलम ने कहा कि नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए चिकित्सकीय देखभाल के साथ परिवार का सहयोग भी बेहद जरूरी है। डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि अस्पताल से छुट्टी के बाद भी अभिभावक चिकित्सकों की सलाह के अनुसार स्तनपान, साफ-सफाई और नियमित स्वास्थ्य जांच का ध्यान रखें।



