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“रामनवमी का त्योहार”*

त्रिलोकी नाथ प्रसाद

राम जन्म की बेला आई, मंगल गाए धाम।

अयोध्या नगरी हर्षित सारी, गूंजे जय श्रीराम॥

कौशल्या के लाल विराजे, सुख के सागर राम।

दुख हरने अवतार लिए हैं, दीनन के भगवान॥

धरती पर जब पाप बढ़े हैं, तब-तब आए राम।

सत्य, धर्म की राह दिखाकर, किया जगत का काम॥

मर्यादा के मूर्त स्वरूप, सबके प्यारे राम।

जीवन को पावन कर देते, लेते जो उनका नाम॥

वन-वन भटके धर्म बचाने, संग लक्ष्मण भ्राता यार।

सीता संग संकट सहते, जग में किया उद्धार॥

रावण जैसे अहंकार का, अंत किया श्रीराम।

अधर्मों के तम को हरकर, फैलाया शुभ नाम॥

भक्तों के मन मंदिर में वे, सदा करें विश्राम।

श्रद्धा से जो उन्हें पुकारे, देते उसे विश्राम॥

रामराज्य की छाया में था, सुखमय सारा ग्राम।

न्याय, नीति और प्रेम से ही, जग में बढ़ा मान॥

आज भी जो राम को माने, सच्चे मन से राम।

उसके जीवन में खिल जाते, सुख-शांति के धाम॥

रामनवमी का पर्व ये पावन, देता यही संदेश।

सत्य, प्रेम, मर्यादा अपनाओ, जीवन हो विशेष॥

भाईचारे की डोर बढ़ाओ, मिटे मन का क्लेश।

राम नाम की ज्योति जलाकर, दूर करो अंधेश॥

माता-पिता की सेवा करके, पाओ सच्चा नाम।

उनके चरणों में ही बसता, सारा जगत का धाम॥

करुणा, दया, क्षमा से सजकर, बनो सभी के राम।

ऐसे जीवन से ही मिलता, सच्चा सुख-विश्राम॥
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