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पूर्णिया : सर्वाइकल कैंसर रोकथाम को लेकर बिहार सरकार और यूनिसेफ की संयुक्त पहल, प्रमंडल स्तरीय मीडिया वर्कशॉप आयोजित

पूर्णिया,25नवंबर(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, किशोरियों के स्वास्थ्य सुरक्षा और सर्वाइकल (बच्चेदानी का मुंह) कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ बिहार की ओर से रविवार को पूर्णिया में प्रमंडल स्तरीय मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिलों के पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य रिपोर्टिंग को मजबूती देना और HPV वैक्सीन एवं सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग से संबंधित सही, वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी मीडिया तक पहुंचाना था।कार्यक्रम की शुरुआत स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के रीजनल एडिशनल डायरेक्टर डॉ. पी.के. कन्नौजिया ने की। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जबकि यह एक पूरी तरह रोकथाम योग्य बीमारी है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण और समय पर जांच इसके सबसे प्रभावी उपाय हैं। मीडिया इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ डॉ. पूजा ने कहा कि पोलियो और कोविड जैसी बड़ी मुहिमों में बिहार के पत्रकारों का योगदान बेहद सराहनीय रहा है। उन्होंने कहा, “HPV वैक्सीन किशोरियों को जीवनभर सुरक्षा दे सकती है। लेकिन इसके लिए परिवारों तक साफ, वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना आवश्यक है—और इसमें मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

तकनीकी सत्र में यूनिसेफ के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अंशुमन ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से में होता है और इसके लगभग सभी मामले HPV वायरस से जुड़े होते हैं। देश में वर्ष 2022 में 79,103 नए मामले और 34,805 मौतें दर्ज की गई थीं। उन्होंने कहा कि नियमित स्क्रीनिंग और समय पर पहचान से इस बीमारी को रोका जा सकता है। यह ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सीन द्वारा भी रोकथाम किया जा सकता है।

वर्कशॉप में नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक मधुरेश सिन्हा और यूनिसेफ के राज्य स्तरीय CAP कंसल्टेंट शादाब मलिक ने पत्रकारों को Critical Appraisal Skills (CAS) और Media Reporting Toolkit (MRT) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रिपोर्टिंग में तथ्यों की ठोस जांच, विश्वसनीय स्रोत, मिथकों का खंडन और आसान भाषा बेहद जरूरी है, ताकि जनता भ्रमित न हो।कार्यक्रम में HPV वैक्सीन, किशोरियों के स्वास्थ्य और महिलाओं की स्क्रीनिंग को लेकर समाज में फैली झिझक और गलतफहमियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि माता-पिता, शिक्षक, समुदाय और मीडिया के समन्वय से ही इन मिथकों को दूर किया जा सकता है।

वर्कशॉप के अंत में पत्रकारों ने समूह गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के लिए स्टोरी आइडिया और योजनाएं तैयार कीं। कार्यक्रम का समापन एनएचएम बिहार के रीजनल प्रोग्राम मैनेजर मोहम्मद कैसर इक़बाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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