*कृषि को लाभकारी बनाने के लिए फसल चक्र और जिलावार खेती को किया जा रहा प्रोत्साहित : मंत्री*
– उत्तर बिहार में गन्ना और दक्षिण बिहार में दलहनी फसलों की खेती को दिया जाना चाहिए बढ़ावा: प्रो. गुलाटी
* बिहार की भौगोलिक दशाएं कृषि के लिए उपयुक्त हैं, इसके सही इस्तेमाल से बढ़ेगी किसानों की आय
* राज्य की खेती को प्रगतिशील और लाभकारी बनाने के लिए गुरुवार को बामेती में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला
त्रिलोकी नाथ प्रसाद।कृषि विभाग की पहल पर राज्य की खेती को प्रगतिशील और लाभकारी बनाने के लिए गुरुवार को बामेती सभागार में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “प्रोग्रेसिव और रिमुनरेटिव एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेज इन बिहार” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में कृषि अर्थशास्त्री, कृषि वैज्ञानिक और नीति निर्माता मौजूद थे।
इस मौके पर राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार ने कृषि रोड मैप के जरिए बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार के मगही पान, मिथिला मखाना, मर्चा धान सहित कई जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसी क्रम में हम लोग दीघा मालदा, सोनाचूर चावल जैसे कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप के जरिए फलों और सब्जियों का तेजी से उत्पादन बढ़ा है। धान और गेहूं की जगह दलहन और कैश क्रॉप फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए फसल चक्र और जिलावार खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस कार्यशाला में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर), नई दिल्ली के प्रोफेसर पद्मश्री डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा कि बीते 20 वर्षों में बिहार का जीडीपी ग्रोथ भारत से ज्यादा रहा है। बिहार की भौगोलिक दशाएं कृषि के लिए उपयुक्त हैं। ये इसकी धरोहर हैं। इसका सही इस्तेमाल जरूरी है। मछली पालन, पोल्ट्री, दलहन उत्पादन, गन्ना उद्योग आदि के जरिए यहां खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बाजार को ध्यान में रखकर किसानों से खेती कराई जाए तो इसका लाभ उन्हें मिलेगा। उत्तर बिहार में गन्ना और दक्षिण बिहार में दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। मखाना के साथ मछली पालन कर किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं।
इस मौके पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने कहा कि बिहार की जलवायु और मिट्टी कृषि के काफी अनुकूल है। कृषि को लाभकारी बनाना होगा, तभी हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।
कार्यशाला में राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में कृषि का तेजी से विकास हो रहा है। किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं। फल, सब्जी और मसालों की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
वहीं, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं। नई तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है।
कार्यशाला में आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक मुख्यालय डॉ. संजीव कुमार झा, संजय कुमार सिंह समेत कई अन्य ने कृषि की आधुनिक तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।
वहीं इस मौके पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेन्द्र प्रसाद यादव एवं शैलेन्द्र कुमार, कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव, बीआरबीएन के प्रबंध निदेशक स्पर्श गुप्ता, उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार समेत कृषि विभाग के कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
