जमाबंदी सुधार अभियान की गति को और तेज करें, पंचायतों प्रतिनिधियों संग बैठक से मिल सकेगी गति : मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल

सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) के कार्यों की समीक्षा, जमाबंदी सुधार, उत्तराधिकार नामांतरण और लंबित आवेदनों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश
मापी में तेजी लाने के लिए अंचलों को उपलब्ध कराए गए हैं सर्वे अमीन, उनकी मॉनिटरिंग करें : सचिव
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के माननीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को राजस्व संबंधी सभी कार्यों में तेजी लाने, लंबित मामलों का निर्धारित समय-सीमा में निष्पादन सुनिश्चित करने तथा आम लोगों को विभागीय सेवाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन का उद्देश्य केवल सरकारी कार्यों का निष्पादन नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना भी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माननीय मंत्री शुक्रवार को पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
समीक्षा के दौरान मंत्री डॉ. जायसवाल ने जमाबंदी में त्रुटियों के सुधार और मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण के लिए चलाए जा रहे 45 दिवसीय विशेष अभियान की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि अभियान के उद्देश्यों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए अधिकारी नियमित निगरानी करें। इसकी गति को और बढ़ाएं। इस अभियान की सफलता के लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग अति आवश्यक है। उनके साथ बैठक कर गांव का सही डेटा लें। तभी अभियान को सफलता मिलेगी।
उन्होंने अभियान बसेरा के तहत प्राप्त अधूरे आवेदनों की समस्या के समाधान के लिए विभाग के स्तर से फार्म उपलब्ध कराने और इस कार्य में विकास मित्रों की मदद लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके उपरांत ही उनके आवेदनों को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे आवेदनों की भी सही जांच हो सकेगी। राजस्व महा-अभियान के दौरान प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए माननीय मंत्री ने कहा कि इस दौरान प्राप्त आवेदनों का निष्पादन अभी चल रहे सुधार अभियान में करें। परिमार्जन के लिए पूर्व में आए आवेदनों का भी अभी निष्पादन करें। इससे जमाबंदी अपडेट होगी और लोगों की परेशानी दूर होगी।
**दाखिल-खारिज से लेकर भूमि विवादों के समाधान तक हो नियमित निगरानी**
माननीय मंत्री ने दाखिल-खारिज के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए निर्धारित समय-सीमा में उनका निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने जमाबंदी एवं भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार, अभिलेखों के अद्यतीकरण और उनकी शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा।
उन्होंने विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रगति की नियमित समीक्षा करने तथा संबंधित पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। साथ ही, सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि के अभिलेखों को व्यवस्थित रखने, अतिक्रमण की पहचान करने और नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।
मंत्री ने राजस्व न्यायालयों में लंबित भूमि विवादों की समीक्षा, भूमि लगान वसूली के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति और सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
**डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों के कार्यों की जवाबदेही तय करें**
मंत्री डॉ. जायसवाल ने अपर समाहर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर) और अंचल अधिकारियों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। लंबित आवेदनों, राजस्व न्यायालयों के मामलों और विभागीय सेवाओं के निष्पादन की स्थिति पर नजर रखें। जहां प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां कारणों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं।
सचिव श्री जय सिंह ने कहा कि ई मापी के लंबित मामलों के निष्पादन के लिए सभी अंचल को विशेष सर्वेक्षण अमीन उपलब्ध कराए गए हैं। उन अमीनों की सहायता से लंबित मापी के मामलों में तेजी लाएं। इसके लिए उनके कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाय।सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी ने समीक्षा बैठक का संचालन करते हुए कहा कि अन स्कैन्ड भू अभिलेखों का सभी अधिकारी प्राथमिकता देकर स्कैन कराएं और लॉगिन में आए रिक्वेस्ट को पूरा करें। इस दौरान स्कैन की क्वालिटी पर भी सभी को ध्यान देने की जरूरत है।
बैठक में अपर सचिव श्री अमित कुमार पांडेय, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, उप निदेशक श्रीमती मोना झा, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री मणिभूषण किशोर एवं श्री अनुपम प्रकाश, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर, उप सचिव श्री देवेश कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी श्री राजीव शंकर एवं श्री दीनदयाल राम सहित सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) उपस्थित रहे।
