लखीसराय : राजनीतिक खींचतान में हटाए गए लखीसराय डीएम, मिथलेश मिश्रा को GAD में किया गया पदस्थापित

लखीसराय,08अप्रैल(के.स.)। चंदन सिंह राणा,
मिथलेश मिश्रा को लखीसराय के जिलाधिकारी पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में पदस्थापित किए जाने के बाद राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार इस तबादले के पीछे राजनीतिक खींचतान को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
दो नेताओं की खींचतान में फंसे अधिकारी
जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री एवं राजीव रंजन सिंह तथा बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के बीच लखीसराय क्षेत्र में राजनीतिक वर्चस्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। विजय कुमार सिन्हा लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से लगातार कई बार विधायक रहे हैं और क्षेत्र में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। वहीं ललन सिंह का भी इस क्षेत्र में राजनीतिक आधार है।
सूत्रों का दावा है कि इन दोनों नेताओं के बीच जारी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच डीएम मिथलेश मिश्रा निष्पक्ष प्रशासनिक कार्यशैली अपनाए हुए थे, जिससे किसी भी राजनीतिक खेमे को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा था।
निष्पक्ष कार्यशैली बनी कारण
बताया जा रहा है कि अपने कार्यकाल के दौरान मिथलेश मिश्रा ने प्रशासनिक कार्यों में राजनीतिक दबाव से दूरी बनाए रखी। अधिकारियों के अनुसार उन्होंने विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में निष्पक्षता बरती, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप सीमित रहा। यही कारण उनकी पदस्थापना बदलने की पृष्ठभूमि बना।
GAD में पदस्थापन पर उठे सवाल
प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि सक्रिय जिलाधिकारी को सामान्य प्रशासन विभाग में भेजना सामान्य तबादला जरूर है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे कम सक्रिय भूमिका माना जाता है। इस फैसले को लेकर कई प्रशासनिक विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि यदि राजनीतिक मतभेदों के कारण अधिकारियों को हटाया जाएगा, तो प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होगी। उन्होंने मामले की जांच कराने और मिथलेश मिश्रा को उपयुक्त पद देने की मांग की है।
पहले भी हो चुका है विवाद
सूत्रों के अनुसार इससे पहले भी लखीसराय में पदस्थापित एसपी अजय कुमार का तबादला राजनीतिक तनातनी के बाद हुआ था। अब जिलाधिकारी का तबादला होने से प्रशासनिक स्थिरता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चा को तेज कर दिया है।


