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माननीय कृषि मंत्री ने तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव का किया उद्घाटन

बागवानी और हाई-वैल्यू खेती से बदलेगी बिहार की तस्वीर बागवानी और विशिष्ट फसलें, किसानों की आय बढ़ाने का नया ‘ए.टी.एम. मॉडल’

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक: बागवानी फसलों से बढ़ती किसानों की कमाई
-राम कृपाल यादव

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/राम कृपाल यादव, माननीय मंत्री, कृषि विभाग, बिहार द्वारा आज गाँधी मैदान, पटना में तीन दिवसीय (06-08 फरवरी, 2026) बागवानी महोत्सव का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार द्वारा किया गया।

माननीय मंत्री ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि बिहार की असली ताकत खेतों में पसीना बहाने वाले हमारे किसान भाई-बहन हैं। सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि किसान मजबूत होंगे, तभी बिहार मजबूत बनेगा। इसी सोच के साथ राज्य सरकार बागवानी, उच्च मूल्य वाली खेती, आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ बाजार व्यवस्था को कृषि विकास का मुख्य आधार बना रही है।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का एक स्पष्ट और दूरदर्शी सपना है “हर भारतीय की थाली में बिहार का कम-से-कम एक व्यंजन हो।” यह केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि बिहार के लिए एक सशक्त आर्थिक क्रांति का विज़न है। जब बिहार का लिट्टी-चोखा, मखाना, फल-सब्ज़ियाँ और अन्य कृषि उत्पाद देश की हर थाली तक पहुँचेंगे, तब किसानों की आय बढ़ेगी, राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और बिहार की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी।
यह संकल्प माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘लोकल टू ग्लोबल’ विज़न से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार और किसानों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। बिहार सरकार इसी दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारी रणनीति स्पष्ट है, हर जिले की एक विशिष्ट फसल होगी, उसी के आधार पर क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होंगी और उत्पादों को सशक्त बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। यह मॉडल खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ते हुए किसानों के लिए स्थायी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।
आज बिहार की खेती एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। यह केवल बदलाव नहीं, बल्कि कृषि का नवजागरण है, जहाँ किसान अब उत्पादक के साथ-साथ उद्यमी और निर्यातक भी बन रहा है। बिहार कृषि निर्यात नीति के जरिए किसानों की उपज को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। मखाना, शहद, फल-सब्ज़ियाँ, मसाले और G.I. टैग प्राप्त उत्पाद बिहार की गुणवत्ता और पहचान को मजबूत कर रहे हैं। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और प्रस्तावित शहद नीति आय वृद्धि का सशक्त आधार हैं। हर जिले में विशेष फसल आधारित क्लस्टर बनाकर खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ा जाएगा। बागवानी और विशिष्ट फसलें आज किसानों के लिए एटीएम के समान हैं, जो त्वरित आय और स्थायी समृद्धि का मार्ग खोलती हैं।
माननीय मंत्री ने कहा कि अब खेती को कम लागत और अधिक मुनाफे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। धान और गेहूँ के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, केला, आंवला, सब्जी एवं मसाला फसलें जैसे मिर्च, हल्दी, धनिया, लहसुन और प्याज किसानों की आय बढ़ाने का नया इंजन बन सकती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के हर जिले में स्थानीय जलवायु के अनुरूप हाई-वैल्यू क्लस्टर विकसित किए जाएँ, जहाँ नर्सरी से लेकर उत्पादन, पैकिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री की समुचित व्यवस्था एक ही स्थान पर हो।
उन्होंने कहा कि नई सरकार का फोकस तीन स्तंभों तकनीक, निवेश और रोजगार पर आधारित है। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, पॉली एवं नेट हाउस, टिशू कल्चर पौधे, मृदा परीक्षण, समेकित कीट-रोग प्रबंधन और सटीक पोषण प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उद्यान निदेशालय के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन तथा गुणवत्तापूर्ण पौध एवं बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बागवानी केवल खेती नहीं, बल्कि रोजगार का बड़ा स्रोत है। नर्सरी, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, परिवहन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से लाखों रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इसके लिए हर प्रखंड में किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और बिचौलियों की भूमिका घटे।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन और मखाना बिहार की विशिष्ट पहचान हैं। इन क्षेत्रों में समग्र विकास, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता जाँच और “बिहार ब्रांड” के माध्यम से बाजार तक पहुँच को मजबूत किया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी तरीके से सीधे खेतों तक पहुँचे।
अंत में माननीय मंत्री ने किसानों, युवाओं और महिला समूहों से आधुनिक खेती अपनाने, कृषि आधारित उद्यम शुरू करने और बिहार को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
प्रधान सचिव, कृषि विभाग श्री नर्मदेश्वर लाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसमें बागवानी विशेषकर फल, सब्जी, मसाला, मखाना एवं मधुमक्खी पालन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा उच्च मूल्य वाली फसलों एवं संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। महोत्सव में किसानों को विभिन्न योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है एवं किसानों द्वारा लाए गए उत्कृष्ट उत्पादों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
मैं किसान बंधुओं से आग्रह करता हूँ कि वे फसल विविधिकरण को अपनाते हुए धान, गेहूँ की पारंपरिक खेती के स्थान पर बागवानी फसलों, दलहन एवं तिलहन की ओर अग्रसर हों। विशेष रूप से दक्षिण बिहार के क्षेत्रों में शुष्क बागवानी के अंतर्गत आंवला, एप्पल बेर, नींबू, अमरूद तथा औषधीय एवं सुगंधीय फसलों की अपार संभावनाएँ हैं, जिन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
सरकार द्वारा सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, जिससे शुष्क क्षेत्रों में भी बागवानी फसलों की सफल खेती संभव हो सके। फल एवं सब्जियों की संरक्षित खेती के साथ-साथ उच्च बाजार मूल्य वाली फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
निदेशक उद्यान श्री अभिषेक कुमार ने बागवानी महोत्सव में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य खेत से बाजार तक मूल्य संवर्धन के माध्यम से अधिक आय और रोजगार सुनिश्चित करना है। उन्होंने बागवानी फसलों के उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग एवं निर्यात पर विशेष जोर दिया। ड्रैगन फ्रूट व स्ट्रॉबेरी जैसे एग्जॉटिक फलों तथा ड्रिप, स्प्रिंकलर व माइक्रो-स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मखाना के लिए गठित मखाना बोर्ड निर्यात को नई दिशा देगा और असली परिवर्तन किसानों के खेतों में दिखेगा।

इस अवसर पर पद्मश्री श्रीमती राजकुमारी देवी (किसान चाची), डॉ॰ बीरेन्द्र प्रसाद यादव, विशेष सचिव, कृषि विभाग, श्री सौरभ सुमन यादव, कृषि निदेशक, बिहार, श्री अभिषेक कुमार, निदेशक उद्यान, बिहार, श्री धनंजयपति त्रिपाठी, अपर निदेशक, कृषि विभाग, श्री संतोष कुमार उत्तम, निदेशक, पी॰पी॰एम॰, कृषि विभाग सहित अन्य वरीय पदाधिकारी एवं किसानगण भी उपस्थित थे।

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