फरक्का जल संधि मुद्दा अब एक जन आंदोलन का रुप ले चुका है – जद (यू)

त्रिलोकी नाथ प्रसाद।प्रदेश जद (यू) प्रवक्ता श्री शंभू नाथ सिन्हा एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री चंदन कुमार सिंह ने जारी बयान में कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं पार्टी प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा प्रथम चरण के ‘नीतीश संवाद’ के बाद फरक्का जल संधि का मुद्दा एक जन आंदोलन का रुप ले चुका है।
उन्होंने कहा कि साल 1996 में केंद्र में संयुक्त मोर्च की सरकार और उस सरकार में प्रभावशाली भूमिका में रहे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सरकार ने बिहार हित की बलि चढ़ाकर इस समझौते को होने दिया। जिसका परिणाम यह है कि आज राज्य हर साल बाढ़ और सुखाड़ की त्रासदी झेल रहा है। अब जबकि इस समझौते का दिसंबर में नवीनीकरण होना है, बिहार हित में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा ने इस संधि के नवीनीकरण नहीं करने की बात संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठायी और अपनी आपत्ति दर्ज करायी है।
फरक्का जल संधि के दुष्प्रभावों को लेकर लोगों के बीच जागरुकता फैलाने और उनका दृष्टिकोण जानने के मकसद से गंगा नदी से सटे 12 जिलों में नीतीश संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जहां इस संधि के विरोध एवं बिहार हित की बात को लेकर लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है। जद (यू) ने हमेशा इस संकल्प को दोहराया है कि राज्य हित में इस समझौते का नवीकरण नहीं होना चाहिए।
बिहार की चिंताओं से सहमति जताते हुए विदेश मंत्री श्री एस जयशंकर ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा को पत्र लिखकर फरक्का जल संधि मुद्दे पर बिहार हित की अनदेखी नहीं होने का भरोसा दिया है। विदेश मंत्री की श्री संजय कुमार झा को लिखी चिट्ठी फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी की चिंता की नैतिक विजय है।



