डीएम ने की जल-जीवन-हरियाली अभियान की समीक्षा, अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि प्राप्त करने के लिए तत्पर रहने का दिया निदेश….

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जिले में जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत अमृत सरोवर की 30 योजनाओं को 15 अगस्त तक पूर्ण कर लिया जाएगा

जल-जीवन-हरियाली अभियान की सफलता सुनिश्चित सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता: डीएम

मिशन मोड में जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने का डीएम ने दिया निदेश

त्रिलोकी नाथ प्रसाद =पटना, बुधवार, दिनांक 13 जुलाई, 2022ः जिलाधिकारी, पटना डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने अधिकारियों को जल-जीवन-हरियाली मिशन में लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि प्राप्त करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहने का निदेश दिया है। वे आज समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में इस अभियान की समीक्षात्मक बैठक कर रहे थे। डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान में प्रदत दायित्वों को ससमय सम्पन्न करें।

आज की इस बैठक में डीएम डॉ. सिंह ने विभिन्न विभागों- यथा ग्रामीण विकास विभाग, लघु सिंचाई विभाग एवं नगर विकास विभाग- अंतर्गत जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत योजनाओं की समीक्षा की तथा अद्यतन स्थिति का जायजा लिया। उप विकास आयुक्त श्री तनय सुलतानिया ने पावर प्वाईंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जल संरचनाओं का जीर्णोंद्धार कुओं, सोख्ता, रिचार्ज एवं अन्य जल संरचना का निर्माण, भवनों में छत वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण, सावर्जनिक जल संचयन संरचनाओं को चिन्ह्ति कर अतिक्रमणमुक्त करना, जैविक खेती एवं टपकन सिंचाई, सौर ऊर्जा उपयोग को प्रोत्साहन एवं ऊर्जा संरक्षण सहित विभिन्न बिन्दुओं पर डीएम डॉ. सिंह द्वारा विस्तृत समीक्षा की गई एवं आवश्यक निदेश दिया गया।

डीएम डॉ. सिंह द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत अमृत सरोवर कार्य में प्रगति की समीक्षा की गई। पटना जिला के 23 प्रखंडों में जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत अमृत सरोवर के चिन्ह्ति 80 कार्याें में 30 पर कार्य चल रहा है। 15 अगस्त, 2022 तक जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत अमृत सरोवर के तहत 30 तालाबों पर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

डीएम डॉ. सिंह द्वारा बैठक में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं को चिन्ह्ति कर अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि अतिक्रमित चिन्ह्ति जल संचयन संरचनाओं की संख्या 665 थी जिसमें से 584 जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमणमुक्त करा लिया गया है। शेष 81 को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना है। डीएम डॉ. सिंह ने सभी अंचलाधिकारियों को मिशन मोड में शेष जल संचयन संरचनाओं को भी शीघ्र अतिक्रमणमुक्त कराने का निदेश दिया।

अतिक्रमित 889 कुंओं में से 591 कुओं को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है। शेष 298 कुंओं को भी विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराने का निदेश दिया गया।

डीएम डॉ. सिंह ने सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं के जीर्णोद्धार कार्य की समीक्षा की। लघु सिंचाई विभाग द्वारा 05 एकड़ से अधिक 27 तालाबों का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया जा चुका है। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 05 एकड़ से कम 210 तालाबों का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

1,057 पईन, 256 आहरों एवं 368 सार्वजनिक कुंओं का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण हो गया है।

डीएम डॉ. सिंह ने 05 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली जल संरचनाओं की मत्स्य विभाग एवं जीविका से प्राप्त प्रखण्डवार सूची की प्रविष्टि जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर करने को कहा।

सार्वजनिक कुंओं/चापाकलों के किनारे सोख्ता/रिचार्ज/अन्य जल संरचना के निर्माण के समीक्षा के क्रम में पाया गया कि जिले में फेज-1 के तहत 862, फेज-2 के तहत 819 एवं फेज-3 के तहत 794 सोकपिट कार्य मनरेगा योजनाओं के तहत किया गया है।

नये जल-स्त्रोतों के सृजन के तहत ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 111, मत्स्य विभाग के द्वारा 55 एवं कृषि विभाग द्वारा 30 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है।

भवनों के छत के वर्षा जल संचयन हेतु संरचना का कार्य सोख्ता की तरह भू-जल रिचार्ज किया जाना है, परंतु इसका क्षेत्रफल एक सोख्ता के अपेक्षा काफी अधिक होता है एवं इसके माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग भू-जल रिचार्ज के साथ दैनिक कार्याे में भी होता है। छत पर वर्षा जल संचरना का निर्माण भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निकायों के द्वारा किया जा रहा है। डीएम डॉ. सिंह ने छत वर्षा जल संचयन कार्य को प्राथमिकता के तौर पर निष्पादित करने एवं जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर प्रविष्टि करने का निदेश दिया।

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत पौधशाला सृजन एवं सघन वृक्षारोपण में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 1,674 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है।

जैविक कृषि एवं टपकन सिंचाई के द्वारा कृषि में जल के न्यूनतम उपयोग के द्वारा सिंचाई सुनिश्चित की जाती है। इससे एक ओर जल का अधिकतम उपयोग संभव हो पाता है। साथ ही मृदा क्षरण को रोकते हुए मृदा की भू-जल धारण क्षमता भी बढ़ती है। कृषि विभाग के जैविक कृषि एवं टपकन सिंचाई पर कार्य किया जा रहा है। वैकल्पिक फसलों, टपकन सिंचाई एवं अन्य नयी तकनीकों के उपयोग की 95 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि उर्जा बचत के तहत विद्युत उर्जा उपयोग में कमी लाना एवं वैकल्पिक उर्जा के रूप में सौर उर्जा का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अभियान के तहत जिला स्तरीय सरकारी भवनों में विद्युत उपभोग को कम किये जाने एवं सौर उर्जा युक्त किये जाने का कार्य किया जा रहा है। अभियान अन्तर्गत अबतक कुल 104 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है।

पटना नगर निगम द्वारा सोख्ता निर्माण की 220 में से 212 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है। डीएम डॉ. सिंह ने नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत योजनाओं को विशेष अभिरूचि लेकर पूर्ण करने का निदेश दिया। कुंआ, तालाब एवं पोखर का जीर्णोद्धार, सोख्ता का निर्माण कार्य का जल-जीवन-हरियाली अभियान पोर्टल पर प्रविष्टि कराने का निदेश दिया गया। डीएम डॉ. सिंह ने उप विकास आयुक्त को नगर कार्यपालक पदाधिकारियों के साथ प्रतिदिन जूम मिटिंग के द्वारा प्रगति में समीक्षा करने का निदेश दिया।

डीएम डॉ. सिंह ने जीविका को आवंटित जलाशयों को जीर्णोद्धार कर मत्स्य पालन आरंभ करने का निदेश दिया।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान सफलता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी पदाधिकारियों को तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहना होगा।
डीपीआरओ, पटना

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