डीडीसी की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जिला सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक हुई।।…

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वित्तीय वर्ष 2022-23 में *110 पीड़ितों के बीच 1 करोड़ 10 लाख रुपया के राहत अनुदान* का भुगतान किया गया

*तीन महीना में मुआवजा राशि के भुगतान में 11 गुणा ज्यादा वृद्धि*

प्रशासन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के *सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध*: डीडीसी

त्रिलोकी नाथ प्रसाद:-पटना, सोमवार, दिनांक 29.08.2022:- जिला पदाधिकारी, पटना डॉ. चन्द्रशेखर सिंह के निदेश पर उप विकास आयुक्त, पटना श्री तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में आज समाहरणालय स्थित सभागार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 नियम 1995 के क्रियान्वयन हेतु जिला सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की *तृतीय* बैठक हुई। डीडीसी श्री तनय सुल्तानिया ने कहा कि प्रशासन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के *सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध* है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रति अत्याचार के विरूद्ध *शून्य सहिष्णुता के सिद्धान्त* का अक्षरशः अनुसरण किया जा रहा है। *अत्याचार निवारण प्रक्रिया में सम्पूर्ण तंत्र संवेदनशील, तत्पर एवं सजग है।*

आज के इस बैठक में समिति के सदस्य-सचिव जिला कल्याण पदाधिकारी श्री राणा वैद्यनाथ कुमार सिंह द्वारा विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। डीडीसी श्री सुल्तानिया द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 नियम 1995 के क्रियान्वयन हेतु गठित जिला सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की दिनांक 30.05.2022 को आयोजित *द्वितीय* बैठक के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की गई तथा अद्यतन प्रगति का जायजा लिया गया। अधिनियम अंतर्गत दर्ज मामलों की समीक्षा की गई। पुलिस द्वारा प्रतिवेदित एवं निष्पादित कांडों, समर्पित आरोप पत्रों, गिरफ्तारियों एवं मुआवजा भुगतान से संबंधित मामलों के भौतिक एवं वित्तीय प्रतिवेदन पर विस्तृत चर्चा हुई।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में *मुआवजा, राहत पेंशन एवं पुनर्वास* मद में 110 लाख रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ था। प्राप्त राशि का *शत-प्रतिशत* व्यय करते हुए *110 पीड़ितों* को राहत अनुदान का भुगतान कर दिया गया है। कैलेण्डर वर्ष 2022-23 में कुल 57 काण्डों में 60 पीड़ितों को राहत अनुदान की भुगतान की स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है। इसमें पूर्व के लंबित तीन काण्ड भी शामिल है। *गौरतलब है कि दिनांक 30 मई, 2022 को आयोजित द्वितीय बैठक तक* मुआवजा, राहत पेंशन एवं पुनर्वास मद में प्राप्त आवंटन 10 लाख रुपये के विरूद्ध 09 पीड़ितों को रुपया 9.88 लाख की राहत राशि का भुगतान किया गया था तथा कैलेण्डर वर्ष 2022-23 में कुल 38 काण्डों में 41 पीड़ितों को राहत अनुदान की राशि भुगतान की स्वीकृति प्राप्त हुई थी। *इस प्रकार तीन महीने के अंदर 50 प्रतिशत की भौतिक प्रगति एवं 11 गुणा वित्तीय प्रगति हुई है।*

समिति द्वारा स्वीकृत 57 काण्डों का अनुश्रवण किया गया।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत हत्या के मामले में कुल 61 मृतकों के आश्रितों को पेंशन की राशि प्रदान की जा रही है। *जुलाई, 2022 तक पेंशन का भुगतान कर दिया गया है।*

डीडीसी श्री सुल्तानिया ने सभी पीड़ितों को राहत अनुदान की राशि का शीघ्र भुगतान करने का निदेश दिया। उन्होंने आदेश दिया कि सभी प्रखण्ड कल्याण पदाधिकारी/विकास मित्र पीड़ितों का बैंक खाता खुलवाने एवं आधार संख्या प्राप्त करने के कार्य में तत्पर रहें ताकि पीड़ितों को राहत अनुदान राशि का भुगतान शीघ्रता से किया जाए। डीडीसी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का निदेश दिया।

डीडीसी श्री सुल्तानिया ने अधिनियम के तहत प्राप्त होने वाले मामलों को *संवेदनशीलता के साथ ससमय निष्पादित* करने का निदेश दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि सीसीटीएनएस (क्रायम एण्ड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) पर कोई भी इन्ट्री छूटे नहीं। आरोप गठन एवं समझौता वाले काण्डों की सूची लोक अभियोजक से प्राप्त करें। नियमित पत्राचार कर लंबित काण्डों का निष्पादन सुनिश्चित करें। डीडीसी श्री सुल्तानिया ने इस अधिनियम के प्रावधानों का वृहत स्तर पर प्रचार-प्रसार करने का निदेश दिया।

डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु हम सबको *प्रतिबद्ध* एवं *दृढ़संकल्पित* रहना होगा।

इस बैठक में माननीय सांसद के प्रतिनिधि, माननीय विधायक के प्रतिनिधि, पद्मश्री श्रीमती सुधा वर्गीस, अपर पुलिस अधीक्षक, विशेष लोक अभियोजक, सिविल सर्जन, अपर समाहर्त्ता विशेष कार्यक्रम, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी एवं समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

 

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