प्रमुख खबरें

दो साल से पुराने राजस्व मामलों का प्राथमिकता के आधार पर करें निष्पादन : जय सिंह

सचिव सीमा त्रिपाठी का राजस्व न्यायालयों में डिजिटल मोड में सुनवाई सुनिश्चित करने पर जोर, लंबित मामलों की नियमित करें समीक्षा

राज्य के सभी भूमि सुधार उप समाहर्ताओं की दो पालियों में कार्यों की हुई समीक्षा

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने राज्य के सभी भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर) को दो साल से अधिक समय से लंबित राजस्व मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत सभी राजस्व न्यायालयों में हर हाल में डिजिटल मोड में सुनवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन और न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने इस दौरान अधिकारियों से राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली पर हो रही सुनवाई की स्थिति जानी और कमियों में तत्काल सुधार का निर्देश अधिकारियों को दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों को अभियान बसेरा के तहत 30 हजार भूमिहीन परिवार को जमीन देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपने नेतृत्व में पूरा कराने को कहा।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लगातार कार्यों की समीक्षा करने का उद्देश्य जनता को समयबद्ध और पारदर्शिता के साथ विभागीय सेवाओं का लाभ देना है। दो पालियों में भूमि सुधार उप समाहर्ताओं की इस समीक्षा बैठक का संचालन विभाग के अपर सचिव श्री अमित कुमार पांडेय ने किया।

राजस्व न्यायालयों में डिजिटल मोड में ही करें सुनवाई : सीमा त्रिपाठी

सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी ने राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत सभी राजस्व न्यायालयों में प्रत्येक सुनवाई डिजिटल मोड में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर उन्होंने जोर दिया।
इस दौरान RCMS के तहत राजस्व न्यायालयों के कार्यों और लंबित वादों की स्थिति की समीक्षा की गई। अतिक्रमण से संबंधित मामलों, दाखिल-खारिज अपीलों तथा बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम (BLDRA) के तहत लंबित मामलों पर भी डेटा के साथ चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पुराने मामलों को चिह्नित कर उनके त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही, सभी राजस्व न्यायालयों में डिजिटल मोड में सुनवाई की व्यवस्था का अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित करें।

दाखिल-खारिज अपील के लंबित मामलों की समीक्षा

दाखिल-खारिज के मामलों में निष्पादन और अस्वीकृति की स्थिति के साथ आवेदनों में पाई जाने वाली त्रुटियों की भी समीक्षा की गई। त्रुटियों के निराकरण और लंबित आवेदनों के नियमानुसार निष्पादन पर जोर दिया गया।
परिमार्जन प्लस के लंबित आवेदनों, डिजिटाइज्ड जमाबंदी और छूटी हुई जमाबंदी से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए इनके त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया गया। भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार और छूटे हुए अभिलेखों के अद्यतीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी बल दिया गया।

सरकारी भूमि और जनकल्याणकारी अभियानों की प्रगति की समीक्षा

बैठक में सरकारी भूमि के सत्यापन, सरकारी भूमि की जमाबंदी, अभियान बसेरा और राजस्व महा-अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त ई-मापी सेवा और ऑनलाइन राजस्व सेवाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

लोक शिकायतों के निष्पादन की समीक्षा करते हुए आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों की नियमित निगरानी करें और निष्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर कर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करें।

बैठक का मुख्य उद्देश्य दो साल से अधिक समय से लंबित राजस्व मामलों के निष्पादन में तेजी लाना, सभी राजस्व न्यायालयों में डिजिटल सुनवाई को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आम लोगों को भूमि संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के माध्यम से राहत उपलब्ध कराना था।

इस अवसर पर विभाग के अपर सचिव श्री अमित कुमार पांडेय, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, उप निदेशक श्रीमती मोना झा, उप सचिव श्री अविनाश कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री अनुपम प्रकाश, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर, प्रशाखा पदाधिकारी श्री राजीव शंकर, श्री दीन दयाल राम सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button