झारखंड

आदिवासी संस्कृति हमारी पहचान ही नहीं, प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश भी देती है : मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

रांची, 9 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव का कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने रविवार को अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने महोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला, प्रकृति तथा जीवन-दर्शन को करीब से देखा।

महोत्सव में झारखंड के कलाकारों द्वारा प्रदर्शित पेंटिंग्स और विभिन्न कलाकृतियों के माध्यम से आदिवासी जीवन, संघर्ष, प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप देने का प्रयास किया गया है। मंत्री ने कलाकारों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक चित्र और कलाकृति झारखंड की गौरवशाली विरासत की कहानी कहती है, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी हैं।

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि “आदिवासी संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का दर्शन भी है।” उन्होंने कहा कि आदिवासी परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक भावना, सह-अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश निहित है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन कला, संस्कृति और परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। झारखंड की आदिवासी कला और संस्कृति को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली आदिवासी विरासत को संजोने, उसका सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों तक इसे गर्व के साथ पहुंचाने का संकल्प लें।

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