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माननीय कृषि मंत्री द्वारा कृषि शिक्षा, प्राकृतिक खेती, अनुसंधान एवं कृषि उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय की व्यापक समीक्षा

कृषि शिक्षा, प्राकृतिक खेती एवं कृषि नवाचार को नई दिशा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

कृषि विश्वविद्यालय में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं नवाचार को सर्वोच्य प्राथमिकता
-विजय कुमार सिन्हा

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/माननीय कृषि मंत्री, बिहार श्री विजय कुमार सिन्हा ने आज कृषि भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रसार, प्रशासनिक एवं वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुख, अनुसंधान आधारित एवं किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निदेश दिए गए।

बैठक के दौरान माननीय मंत्री ने विश्वविद्यालय में स्वीकृत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां रहने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निदेश दिया कि रिक्त पदों को सूची तैयार कर रिक्तियों को बिहार लोक सेवा आयोग एवं बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से नियमानुसार जल्द भरने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कृषि महाविद्यालयों में नामांकन की स्थिति की समीक्षा करते हुए निदेश दिया कि राज्य के सभी कृषि महाविद्यालयों में उपलब्ध सीटों पर वेटिंग लिस्ट बनाकर शत्-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, कृषि शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार, स्टार्टअप, उद्यमिता एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी युवाओं तक व्यापक रूप से पहुंचाई जाए, ताकि अधिकाधिक छात्र-छात्राएं कृषि शिक्षा से जुड़ें।

माननीय मंत्री ने राज्य में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरूप देने पर बल देते हुए कहा कि कृषि छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए निदेश दिया कि कृषि महाविद्यालयों के छात्र प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार एवं किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ें।

उन्होंने निदेश दिया कि राज्य के सभी कृषि महाविद्यालयों में एग्री स्टैक, फार्मर आईडी, मिट्टी जांच एवं प्राकृतिक खेती विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएं। इससे छात्रों को नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी मिलने के साथ-साथ एग्री स्टैक-फार्मर आईडी अभियान को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी निदेश दिया कि सरकारी विद्यालयों में स्थापित मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं से कृषि छात्रों को जोड़ा जाए, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त हो सके।

बैठक में कृषि आधारित स्टार्टअप एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। माननीय मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित स्टार्टअप को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराने तथा उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातकों को स्वरोजगार एवं नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

माननीय मंत्री ने राज्य की नर्सरियों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से नर्सरी प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त छात्र/छात्रओं एवं प्रशिक्षित युवाओं को इस कार्य से जोड़ने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन एवं आधुनिक नर्सरी प्रबंधन से किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा।

बैठक में विश्वविद्यालय की निविदा प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। माननीय मंत्री ने निदेश दिया कि सभी निविदाएं पूर्ण पारदर्शिता एवं नियमों के अनुरूप संपादित की जाएं तथा समय-समय पर उनकी समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने निदेश दिया कि शारदीय (खरीफ), वासन्तिक (रबी) एवं ग्रीष्मकालीन फसलों के मौसम से पूर्व अनुसंधान की प्राथमिकताओं के निर्धारण हेतु कृषि विभाग एवं विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों तथा अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि नई फसल किस्मों के विकास में किसानों की आवश्यकताओं, आय वृद्धि, जलवायु अनुकूलता एवं अधिक उत्पादन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए।

माननीय मंत्री ने विश्वविद्यालय की फूड टेस्टिंग प्रयोगशाला को अत्याधुनिक, पारदर्शी एवं उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित करने का निदेश दिया। साथ ही कृषि विषय में शिक्षित छात्र-छात्राओं को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं में प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बैठक में राज्य के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा इसकी जांच रिपोर्ट शीघ्र विभाग को उपलब्ध कराने का निदेश भी दिया गया।

माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक एवं कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों की भूमिका किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा बिहार को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को सभी निदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निदेश दिए।

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