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जिसे जनता ने दिखाया सत्ता से बाहर का रास्ता वो दे रहे अनर्गल ज्ञान – अरविंद निषाद तेजस्वी की अनर्गल बयानबाजी से सच्चाई नहीं बदल सकती – अरविंद निषाद

त्रिलोकी नाथ प्रसाद /जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्री अरविंद निषाद ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सोशल मीडिया पोस्ट पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत विरासत से हुई हो, उन्हें जनादेश, स्थिरता और शासन पर उपदेश देने से पहले आत्ममंथन कर लेना चाहिए। बिहार की जनता भली-भांति जानती है कि विकास की बात करने वालों और अवसर मिलने पर विभागों को ठप छोड़ देने वालों में अंतर क्या होता है। जो नेता सत्ता में रहते हुए फाइलों से अधिक फोटोशूट में व्यस्त रहे, वे आज प्रशासनिक गति पर प्रश्न उठा रहे हैं, यह राजनीतिक विडंबना का सर्वोत्तम उदाहरण है।

माननीय श्री नीतीश कुमार पर टिप्पणी करने से पहले तेजस्वी यादव को यह याद कर लेना चाहिए कि बिहार को जंगलराज से सुशासन की ओर ले जाने का काम किसने किया। सड़कों से लेकर स्कूलों तक, महिला सशक्तिकरण से लेकर पंचायतों में भागीदारी तक, कानून व्यवस्था से लेकर निवेश के वातावरण तक-हर मोर्चे पर परिवर्तन का इतिहास दर्ज है। जनता ने कई बार भरोसा इसलिए जताया क्योंकि नेतृत्व काम से साबित हुआ, न कि परिवार के उपनाम से।

आज जो लोग सरकार गठन और पुनर्गठन की बातें कर रहे हैं, वही लोग हर चुनाव के बाद जोड़-तोड़, दबाव और निजी महत्वाकांक्षा की राजनीति में सबसे आगे दिखे हैं। जिन्हें अपने दल में लोकतंत्र स्थापित करने का साहस नहीं, वे लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। जिनकी पार्टी में निर्णय परिवार की बैठक में होते हों, वे कैबिनेट प्रक्रिया पर ज्ञान बाँट रहे हैं।

बिहार की जनता यह भी जानती है कि बेरोजगारी, पलायन और गरीबी पर सबसे ऊँची आवाज वही लोग उठाते हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में रोजगार के नाम पर घोषणाएँ और नियुक्तियों के नाम पर भ्रम फैलाया। युवाओं को नौकरी का फर्जी सपना दिखाने वालों को अब नैतिकता का प्रमाणपत्र बाँटने का अधिकार नहीं है।

तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि वे दूसरों की सरकार गिनने से पहले अपनी राजनीतिक परिपक्वता के महीने गिन लें। बिहार की जनता सब देख रही है-कौन काम कर रहा है और कौन केवल शब्दों की खेती। चुनावी मौसम आते-जाते रहेंगे, पर जनता अब विरासत नहीं, क्षमता पर वोट देती है।

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