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माननीय उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कैथी लिपि में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों के कारण राज्य के आम लोगों को लंबे समय से व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद। इन परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से कैथी लिपि के जानकार विशेषज्ञों का पैनल गठित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया था।

उन्होंने कहा कि विभाग के प्रधान सचिव एवं सचिव द्वारा इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया है। अब प्रशिक्षित कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए प्रति पृष्ठ के हिसाब से दर भी तय कर दी गई है, ताकि आम नागरिकों को आसानी से और पारदर्शी तरीके से दस्तावेजों का अनुवाद उपलब्ध कराया जा सके।

माननीय उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन विशेषज्ञों की सहायता से अब पुराने भूमि अभिलेखों का सरल और सटीक अनुवाद संभव होगा। इससे न केवल आम लोगों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के कार्यों को भी गति और स्पष्टता मिलेगी।

 

कैथी लिपि प्रशिक्षण में कराया गया ऐतिहासिक विरासत से व्यवहारिक दस्तावेजी अभ्यास तक

मिथिला, भोजपुरी, मगध व तिरहुत शैली पर केंद्रित प्रशिक्षण में जमीन से जुड़े दस्तावेजों का कराया गया गहन अभ्यास

पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का हुआ समापन

पटना : कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ। इस दौरान कैथी लिपि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर उसके व्यवहारिक उपयोग तक का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न क्षेत्रीय शैलियों के साथ-साथ भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को पढ़ने, समझने और अनुवाद करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिन विशेष कार्य पदाधिकारी श्री अनुपम प्रकाश ने इसका उद्देश्य बताया तो बीएचयू के शोध छात्र सह प्रशिक्षक प्रीतम कुमार ने कैथी लिपि का सामान्य परिचय देते हुए उसकी ऐतिहासिकता, विशेषताओं तथा कैथी के सरल स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं सारण निवासी प्रशिक्षक वकार अहमद ने भूमि से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों में प्रयुक्त उर्दू–फारसी शब्दावलियों की जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन का फोकस मिथिला शैली की कैथी लिपि पर रहा। इस अवसर पर प्रीतम कुमार ने मिथिला क्षेत्र में प्रचलित कैथी वर्णमाला एवं पांडुलिपियों की विशेषताओं को रेखांकित किया। वकार अहमद द्वारा मिथिला क्षेत्र से संबंधित केवाला एवं खतियान दस्तावेजों का अभ्यास कराया गया।

तीसरे दिन के प्रारंभिक सत्र में प्रीतम कुमार ने भोजपुरी प्रकार की कैथी लिपि का परिचय कराते हुए संपूर्ण उत्तर भारत में कैथी लिपि में उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों की जानकारी साझा की। इसी दिन वकार अहमद ने भोजपुरी क्षेत्रों से प्राप्त कैथी दस्तावेजों का व्यावहारिक अभ्यास कराया।

चतुर्थ दिवस में प्रशिक्षकों द्वारा मगध क्षेत्र की कैथी लिपि के अक्षर ज्ञान पर विशेष बल दिया गया तथा इस शैली में उपलब्ध भूमि से जुड़े दस्तावेजों का अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण के पांचवें एवं अंतिम दिन प्रीतम कुमार ने तिरहुत क्षेत्र की कैथी वर्णमाला सहित कैथी लिपि के समग्र क्षेत्रों के अक्षरों को तालिका के रूप में समझाया। समापन सत्र में वकार अहमद ने भूमि से संबंधित एक केवाला दस्तावेज का अक्षरशः अनुवाद कराकर प्रशिक्षुओं से स्वयं लेखन अभ्यास कराया।

आरएसटीआई के प्राचार्य दिव्य राज गणेश ने समापन के मौके पर कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कैथी लिपि की समझ को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भूमि अभिलेखों के अध्ययन और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे राज्य को इस भाषा के अनुवाद में काफी लाभ मिलेगा।

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