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सहरसा : शारदीय नवरात्र के दौरान विगत 74 वर्षों से जारी है नगर कीर्तन की परम्परा : प्रो० गिरिधर प्रसाद

सहरसा, 12 अक्टूबर (के.स.)। अजय कुमार, शारदीय नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा के अवसर पर नगर कीर्तन परम्परा पहले दिन प्रातः 4 बजे से नगर कीर्तन का शुभारम्भ हुआ। दर्जनों की संख्या में नगर के लोग ढोलक, झाल, हारमोनियम, करताल, खँजरी, बजाते हुए राम नाम महामन्त्र का गान “हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” का गान बड़े उत्साह पूर्वक नगर भ्रमण किया।

इस परम्परा की शुरुआत वर्ष 1952 ई से 74 वर्षो अनवरत चली आरही है। इसकी शुरुआत कायस्थ टोला मुहल्ला निवासी हमारे पूर्वजों द्वारा की गई थी। स्व अश्वनी लाल दास, स्व कुलेन्द्र प्रसाद, स्व हलधर प्रसाद, भैनी मरर, टीको दास, मखन शर्मा, चिनो लाल, नूनू लाल, रामप्रवेश शर्मा, गोनर शर्मा, घनश्याम निर्मोही, गोपाल कृष्ण सिन्हा शामिल थें।

वर्तमान समय में सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो० गिरिधर प्रसाद सिन्हा उर्फ पूटीश के नेतृत्व में नगर के युवा बुजुर्गो की टोली अपने पूर्वजों की विरासती नगरकीर्तन परम्परा का निर्वहन हर वर्ष माँ दुर्गापूजा के अवसर पर करते चले आ रहे है।पूर्व नगर अध्यक्षा रेणु सिन्हा, प्रो० किशोर नाथ झा, रमाकांत रमन, जयशंकर प्रसाद, अंजनी सिन्हा, ढोलक वादक किशोर शर्मा, लगनदेव शर्मा, सन्तोष कुमार, कुलदीप शर्मा, कपली शर्मा, छोटन शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, सिद्धान्त श्रीवास्तव, आनंद कुमार, योगानंद सिन्हा, नूनू बाबू सिन्हा, राज कुमार सिन्हा, राजेश शर्मा, बीजो शर्मा, राजू शर्मा, संतलाल शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, आदि सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

इस आयोजन में नगर के सभी लोग बच्चे बूढ़े माताये बहने इस मे भाग लेते है।उन्होने बताया कि शहर के सभी प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर एवं धार्मिक स्थल पर कीर्तन किया जाता है। उन्होने बताया कि कोशी बांध निर्माण से पूर्व कोशी की विभिषका से बचने के लिए राम नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया जो वर्तमान समय में जीवंत परम्परा आज भी कायम है।

dharmendra singh

धर्मेन्द्र सिंह प्रिंट माध्यम में 17 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं।राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है।

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