ज्योतिष/धर्मबिहारब्रेकिंग न्यूज़

सहरसा : गायत्री शक्तिपीठ में शैलपुत्री पूजन के साथ शारदीय नवरात्र का हुआ शुभारंभ

देवी के नौ रूप मनुष्य की ऊर्जा, चेतना और साधना के क्रमिक विकास के प्रतीक : डॉ अरुण कुमार जायसवाल

सहरसा, 11 अक्टूबर (के.स.)। अजय कुमार, गायत्री शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को कलश स्थापित कर आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र व्रतारम्भ किया गया।इस अवसर पर कलश स्थापना एवं जयंती का अनुष्ठान शक्तिपीठ की देवकन्याओं मनीषा, प्रतिज्ञा एवं जूली ने विधि-विधान से पूजन कराया। मुख्य यजमान के रूप में पंकज जायसवाल ने अपनी पत्नी के साथ पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर आयोजित व्यक्तित्व परिष्कार सत्र में डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने दशहरा के आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि दशहरा का संबंध दस प्रकार के पापों के हरण से है। मनुष्य के पापों को शारीरिक, वाचिक एवं मानसिक तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। चोरी, हिंसा एवं अनैतिक संबंध शारीरिक पाप हैं। कटु वचन, झूठ, चुगली एवं अनर्गल बातें वाणी से जुड़े पाप हैं।

वहीं द्वेष, लालच एवं अनुचित विषयों में मन लगाना मानसिक पाप है। इन दस पापों से मुक्ति ही दशहरा का वास्तविक आध्यात्मिक संदेश है। उन्होंने कहा कि धर्माचरण के माध्यम से ही इन विकारों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। विजयादशमी के आदर्श पुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम राम को वाल्मीकि रामायण में धर्म का साकार स्वरूप बताया गया है। जबकि मां गंगा को धर्म की प्रवाहमान धारा के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।

उन्होंने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आध्यात्मिक व्याख्या करते कहा कि देवी के नौ रूप मनुष्य की ऊर्जा, चेतना और साधना के क्रमिक विकास के प्रतीक हैं।मां ब्रह्मचारिणी साधक की ऊर्जा को ब्रह्म की ओर उन्मुख करती हैं। जबकि मां चंद्रघंटा प्रज्ञा दृष्टि प्रदान करती हैं। मां कूष्मांडा दिव्य तेज धारण करने की क्षमता, स्कंदमाता आध्यात्मिक जीवन की दिव्यता एवं मां कात्यायनी साधना के अवरोधों को दूर करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

उन्होंने बताया कि मां कालरात्रि चित्त के कुसंस्कारों एवं तमस का नाश करती हैं।मां महागौरी निर्मल चेतना का प्रतीक हैं एवं मां सिद्धिदात्री साधना की पूर्णता, कैवल्य ज्ञान व मोक्ष की अधिष्ठात्री हैं।नवरात्र साधना का उद्देश्य मनुष्य की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में प्रवाहित कर उसे आत्मबोध की ओर ले जाना है। शक्तिपीठ में 16 अक्टूबर को विभिन्न संस्कार संपन्न कराए जायेंगे। 18 अक्टूबर को कंप्यूटर शिक्षण संस्थान के पुराने बैच का दीक्षांत समारोह एवं नए बैच का दीक्षारंभ समारोह आयोजित होगा।वहीं 19 अक्टूबर को नवरात्र अनुष्ठान की पूर्णाहुति की जायेगी।

dharmendra singh

धर्मेन्द्र सिंह प्रिंट माध्यम में 17 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं।राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है।

Related Articles

Back to top button