जाति के कॉलम में “कायस्थ” लिखें : राजीव रंजन प्रसाद..

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जितेन्द्र कुमार सिन्हा, :भगवान चित्रगुप्त महाराज की दो पत्नी थी देवी शोभावती और देवी नंदिनी। पहली पत्नी देवी शोभावती से 8 पुत्र और दूसरी देवी नंदिनी से 4 पुत्र हुए थे। इस प्रकार भगवान चित्रगुप्त महाराज के कुल 12 पुत्र है। इन पुत्रों को भानु, विभानु, विश्वभानु, वीर्यभानु, चारु, सुचारु, चित्र (चित्राख्य), मतिभान (हस्तीवर्ण), हिमवान (हिमवर्ण), चित्रचारु, चित्रचरण और अतीन्द्रिय (जितेंद्रिय) नाम से नामित किया गया है।

बिहार में जाति आधारित जनगणना की शुरुआत 7 जनवरी से शुरु हो गई है। इस जनगणना की प्रमुख बातें हैं (1) सबसे पहले मकानों की गिनती होगी। (2) सभी मकानों को एक यूनिट नंबर दिया जाएगा। (3) एक मकान में यदि दो परिवार रहते हैं तो उनका अलग-अलग नंबर होगा। (4) एक अपार्टमेंट के सभी फ्लैट का अलग-अलग नंबर दिया जाएगा। (5) जाति गणना फार्म पर परिवार के मुखिया का हस्ताक्षर अनिवार्य होगा। (6) राज्य के बाहर नौकरी करने गए परिवार के सदस्यों को भी जानकारी देनी होगी। (7) जाति गणना में उपजाति की गिनती नहीं होगी।(8) परिवारों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी जुटाई जाएगी। (9) प्रखंड में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी जुटाई जाएगी जैसे – रेललाइन, तालाब, विद्यालय, डिस्पेंसरी आदि।(10) जनगणना कार्य में लगाए गए कर्मियों के पास आई कार्ड होगा, जिस पर बिहार जाति आधारित जनगणना –2022 लिखा होगा। उक्त बातें जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने जीकेसी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा से हुई वार्ता के दौरान कही।

उन्होंने बताया कि बिहार में जातिगत जनगणना का पहला चरण 7 जनवरी, 2023 से शुरू हो गया है। पहले चरण में आवासीय मकानों पर नंबर डाले जाएंगे। यह काम 15 दिन चलेगा। दूसरे चरण में 01 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जाति की गिनती समेत 26 प्रकार की जानकारियां लोगों से ली जाएंगी।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बिहार में यह जनगणना जातीय आधारित है इसलिए बिहार के कोने-कोने में रहने वाले कायस्थ समाज के लोग भानु, विभानु, विश्वभानु, वीर्यभानु, चारु, सुचारु, चित्र (चित्राख्य), मतिभान (हस्तीवर्ण), हिमवान (हिमवर्ण), चित्रचारु, चित्रचरण और अतीन्द्रिय (जितेंद्रिय) आदि लोग बिभिन्न सरनेम के साथ रहते हैं। जैसा कि सभी को मालूम है कि बिहार में राजनिति में कायस्थो को लाभ नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कायस्थ समाज से अपील किया है कि पहली बार बिहार में हो रहे जाति आधारित गणना में अपनी पूरी जानकारियां उपलब्ध करवाते समय ध्यान पूर्वक जाति वाले कॉलम में “कायस्थ” ही दर्ज करवाएं और उपनाम कॉलम में भी “कायस्थ” ही दर्ज कराएं। कदापि सर नेम या अन्य जाति उपनाम कॉलम में दर्ज न कराएं।
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