ठाकुरगंज : आखिर विकास से क्यों कोसों दूर है कोल्हा बस्ती गांव।

किशनगंज/फरीद अहमद, जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत भोलमारा पंचायत का कोल्हा बस्ती गांव मूलभूत सुविधा और विकास से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त गांव में जाने के लिए सड़के नहीं हैं और ना ही गांव में मूलभूत सुविधा है। ग्रामीणों का कहना है कि सुखार जैसे दिन में किसी तरह से जीवन यापन रहन सहन और गुजारा हो जाता है। लेकिन बरसात आते ही बाढ़ का सामना करना पड़ता है और पूरा गांव जलमग्न हो जाता है लोग विस्थापित होने को भी मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में पक्की सड़कें तक नहीं है जिससे कि ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत मिल सके। किसी तरह से नदी के किनारे बलवायी जमीन और वह भी दूसरे की जमीन होकर लोग गांव तक पहुंच रहे हैं। विकास कार्य के नाम पर गांव में सिर्फ मिट्टी करण का कार्य कराया जाता है। ग्रामीणों ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि गांव में ना तो सरकारी स्कूल है और ना ही मदरसा जिससे कि बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सके। बच्चों को गांव में निजी मकतब से थोड़ी बहुत शिक्षा प्राप्त होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि वोट के समय आते हैं वादा करते हैं वोट भी मिल जाता है और जीतने के बाद अपने वादे को और विकास कार्य को भूल जाते हैं। उक्त गांव पर छोटे पद के जनप्रतिनिधि से लेकर बड़े पद तक के जनप्रतिनिधि ने आज तक विकास को लेकर कोई बड़ा कार्य गांव में नहीं किया है। देखने में गांव खंडहर जैसा प्रतीत होता है। ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया जुनेद आलम के बारे में भी बताया कि मुखिया पद जीतने के बाद गांव में किसी को देखने तक नहीं आते हैं विकास तो बहुत दूर की बात है। ग्रामीणों ने मनरेगा योजना रोजगार को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास जॉब कार्ड है जिसके बावजूद भी उन लोगों को मनरेगा योजना के तहत रोजगार नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दूसरे पार से मजदूर आते हैं और मनरेगा कार्य करके जाते हैं। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर यह गांव विकास से मरहूम क्यों है और यहां के ग्रामीण ऐसा क्यों कह रहे हैं ? क्या सच में इस गांव के तरफ किसी भी जिम्मेदार लोगों का ध्यान नहीं है जिससे ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं..?