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वासंतिक (रबी) महाअभियान से खेती को मिलेगी नई रफ्तार, 48 लाख हेक्टेयर में फसल उत्पादन की तैयारी

हल्दी, अदरक, टमाटर, मिर्च और प्याज की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को 40 फीसदी सब्सिडी

त्रिलोकी नाथ प्रसाद खेतों का विस्तार, फसलों में विविधता ;किसानों की खुशहाली हमारी प्राथमिकता:- विजय कुमार सिन्हा*

माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि वासंतिक (रबी) फसलों की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि विभाग की ओर से वासंतिक महाअभियान के तहत करीब 48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती कराने की तैयारी की जा रही है। यह पिछले वर्ष की तुलना में छह लाख हेक्टेयर अधिक है। पिछले वर्ष राज्य में लगभग 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर खेती का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण और किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर है।

विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि निर्धारित लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए सभी जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में खेती की नियमित समीक्षा की जाएगी। जहां भी लक्ष्य प्राप्ति में कमी सामने आएगी, उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस वर्ष करीब 48 लाख हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसमें लगभग 24 लाख हेक्टेयर में गेहूं, छह लाख हेक्टेयर में वासंतिक मक्का, पांच लाख हेक्टेयर में दलहन, चार लाख हेक्टेयर में तिलहन तथा नौ लाख हेक्टेयर में आलू, सब्जी, मसाला और अन्य फसलों की खेती शामिल है।

कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत हल्दी, अदरक, टमाटर, मिर्च, पत्ता गोभी और वासंतिक प्याज की खेती का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत इन फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को निर्धारित लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

श्री सिन्हा ने कहा कि हल्दी और अदरक की खेती के लिए फरवरी-मार्च में कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। वहीं, टमाटर, मिर्च और पत्ता गोभी के हाइब्रिड बीजों की टैगिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और उनकी आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है। इससे किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध होंगे और इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक संभावनाओं वाली वैकल्पिक फसलों की खेती भी अपनाएं, जिससे उनकी आमदनी के स्रोत बढ़ सकें।

कृषि मंत्री ने बताया कि हल्दी और अदरक की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इस हिसाब से किसानों को अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी। वहीं, टमाटर, मिर्च और पत्ता गोभी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 60 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इसके तहत किसानों को अधिकतम 24 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। इन फसलों के हाइब्रिड बीजों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है।

श्री सिन्हा ने बताया कि वासंतिक प्याज की खेती के क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम में एग्री फाउंड लाइट रेड के साथ भीमा शक्ति नामक नई प्रभेद को भी शामिल किया गया है। प्याज की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इस प्रकार किसानों को प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। योजना के तहत न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र में खेती के लिए अनुदान का लाभ दिया जाएगा। सरकार की इस पहल से राज्य में प्याज सहित अन्य वैकल्पिक फसलों का उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर आय के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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